गवाह की हत्या के मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख समेत 10 दोषियों को उम्रकैद
बुलंदशहर। वर्ष 2006 में हुई हत्या के मामले में गवाह की 2007 में गोली मारकर हत्या के दस दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। बताया जा रहा है कि सजा पाने वाला दोषी विनोद खुर्जा ब्लॉक का प्रमुख भी रहा है। कोर्ट ने दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
एडीजीसी देवेंद्र सिंह माहुर ने बताया कि 10 अगस्त 2007 को खुर्जा नगर कोतवाली में सतवीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि एक नवंबर 2006 में उसके चचेरे भाई बबलू की हत्या कर दी गई थी। उसके भाई कर्मवीर ने आरोपियों को हत्या करते हुए देखा था, जिसके चलते वह कोर्ट में गवाही दे रहा था। आरोपी उस पर गवाही न देने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे। कोर्ट में गवाही देने के लिए जाने के दौरान 10 अगस्त 2007 को आरोपियों ने कर्मवीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। आरोपियों ने जेल से ही कर्मवीर की हत्या की योजना बनाई थी। घर से निकलने के बाद गांव जाहिदपुर के पास ही आरोपियों ने उसे घेर लिया और गोली मार दी थी।
गोली लगने से जब कर्मवीर घायल होकर भागने का प्रयास करने लगा तो आरोपियों ने उसकी कनपटी पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद आरोपी हवा में तमंचा लहराते हुए मौके से फरार हो गए थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने शिवचरण, बंटी, रविंद्र, विनोद, जितेंद्र, रानू, सुखवीर सिंह, विनोद, कलवा निवासी गांव रामगढ़ी, बिरजी निवासी गांव मुन्ना जाटान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। अब मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय कक्ष संख्या 15 के न्यायाधीश हेमंत कुमार ने दोनों पक्षों के गवाह की बहस सुनने के बाद सभी आरोपियों को दोषी ठहराया है। बताया जा रहा है कि एक आरोपी शिवचरण की मौत हो चुकी है। जबकि शेष दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 10-10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
15 साल में 35 साक्ष्य और गवाह से साबित हुए दोषी
कर्मवीर हत्याकांड के मामले में कोर्ट को आरोपियों को दोषी ठहराने में 15 साल का वक्त लग गया। इस दौरान कोर्ट में पुलिस की ओर से विवेचना करने वाले अधिकारी, शव के फोटो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाह समेत कुल 35 साक्ष्य और गवाह पेश किए गए। जिसके आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार की कोर्ट ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।