खुर्जा। हत्या के मामले में 30 साल बाद अपर सत्र न्यायाधीश दिलीप कुमार सचान ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें एक आरोपी की 2002 में मौत हो गई। इसके अलावा दो दोषियों को अपर सत्र न्यायाधीश बुलंदशहर की ओर से 2001 में निर्णीत किया जा चुका है।
हजरतपुर गांव निवासी डोरी सिंह ने 11 अक्टूबर 1994 को खुर्जा नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया कि वह अपने भांजे धनसिंह मुंडाखेड़ा चौराहे पर वाहन में सब्जी लोड करा रहे थे। इसी दौरान देवेंद्र, रतीराम व राजू निवासी हजरतपुर और पप्पू निवासी खुर्जा आए। आरोपियों ने तमंचे से धनसिंह को गोली मार दी। आईपीसी 307 में मुकदमा दर्ज किया।
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दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान 17 अक्टूबर 1994 को धन सिंह की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने हत्या की धारा आईपीसी 302 में मुकदमा तरमीम किया गया। राजू व रतीराम को अपर सत्र न्यायाधीश बुलंदशहर की ओर से निर्णीत किया जा चुका है।
आरोपी देवेंद्र की वर्ष 2002 में मृत्यु हो गई। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश खुर्जा दिलीप कुमार सचान ने अभियुक्त पप्पू उर्फ प्रेमदत्त को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।