सावन माह का आखिरी सोमवार कल है। इस दौरान जहां शिवालयों में भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। इसके लिए बुलंदशहर में नगर से लेकर देहात तक के शिवालयों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। वहीं, श्रद्धालुओं की ओर से जिले में जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया जाएगा। हिंदू धर्म में सावन माह का अधिक महत्व होता है। मान्यता है कि सावन में कांवड़ लाने और व्रत रखकर शिव की पूजा-आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन मास में इस बार चार सोमवार पड़े। अब अंतिम सोमवार को लेकर भगवान आशुतोष पर चढ़ाने के लिए मंदिरों के बाहर बेल पत्र, फूल और धतुरे की दुकानें लग गई हैं। साथ ही मंदिरों को शानदार तरीके से सजाया गया है।
नगर के प्राचीन राजराजेश्वर मंदिर, भवन मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, कालेश्वर मंदिर, साठा देवी मंदिर, शीतलगंज स्थित शिवालय मंदिर, पंचशील कालोनी स्थित मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, सिद्धेश्वर समेत गांव गंगेरूआ स्थित श्री द्वादश महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ आदि मंदिरों पर जलाभिषेक किया जाएगा। इसी तरह अहार स्थित अंबकेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर, सिकंदराबाद में बालाजी मंदिर, झारखण्डेश्वर मंदिर, कृष्ण तालाब मंदिर और देवीमंदिर, औरंगाबाद में प्राचीन श्री नागेश्वर मंदिर, शिव मंदिर, जहांगीराबाद में प्राचीन अंबकेश्वर मंदिर, पीतांबरा मंदिर और बीन्नेर मंदिर, बुगरासी में शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर और चामुंडा मंदिर समेत सभी मंदिरों में श्रद्धालु विधिवत पूजा अर्चना करेंगे। इसके साथ ही खुर्जा, पहासू, डिबाई, अनूपशहर, शिकारपुर, स्याना आदि क्षेत्रों के मंदिरों में सभी प्रमुख शिवालयों पर भोले के भक्तों की भीड़ रहेगी।
सुख प्राप्ति के लिए सात किलोमीटर की परिक्रमा आज
श्री द्वादश महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ सोमवार को समस्त सुख प्राप्ति के लिए सात किलोमीटर की परिक्रमा निकाली जाएगी। आचार्य मनजीत धर्मध्वज ने बताया कि सावन के चौथे और आखिरी सोमवार समस्त सुखों की प्राप्ति और विश्व में शांति के लिए सात किलोमीटर की परिक्रमा सिद्ध महापीठ से शुरू होगी। इसके समापन के बाद गंगाजल से श्री महालिंगम भगवान पर अभिषेक होगा। उन्होंने भक्तों से परिक्रमा व भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है।