बुलंदशहर। गंगा एक्सप्रेसवे को जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से जोड़ने वाले प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी भी धीमी है। 677.80 हेक्टेयर भूमि के सापेक्ष अब तक केवल करीब 70 हेक्टेयर जमीन का ही अधिग्रहण हो सका है। किसानों के विरोध के बाद सरकार द्वारा सर्किल रेट संशोधित किए जाने के बाद अब नए मुआवजा मूल्य पर अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
परियोजना के तहत बुलंदशहर जिले की पांच तहसीलों के करीब 8700 किसानों की जमीन अधिगृहीत की जानी है। सबसे अधिक प्रभावित सदर तहसील है, जहां 3436 किसानों की भूमि परियोजना की जद में है। वहीं सिकंदराबाद तहसील में 149 किसानों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में है। जिले के 39 गांवों में प्रशासन अधिग्रहण की प्रक्रिया चला रहा है, जबकि पूरी परियोजना के तहत 55 गांवों की भूमि अधिग्रहीत की जानी है।
शुरुआत में किसानों और विभिन्न किसान संगठनों ने पुराने सर्किल रेट के आधार पर दिए जा रहे मुआवजे का विरोध किया था। उनका कहना था कि बाजार मूल्य की तुलना में मुआवजा काफी कम है। विरोध के बाद राज्य सरकार ने सर्किल रेट के पुनरीक्षण के निर्देश दिए। अब संशोधित सर्किल रेट के अनुसार किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि नए रेट लागू होने के बाद अधिग्रहण में तेजी आएगी।
लिंक एक्सप्रेसवे बनने से गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे बुलंदशहर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और परिवहन को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए शेष भूमि का जल्द अधिग्रहण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अभिषेक कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व का कहना है कि सर्किल रेट बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। नई दरों के आधार पर किसानों को मुआवजा वितरण किया जा रहा है। अब अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आएगी।