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विक्रम की दर्दनाक मौत: सिर पर गिरी 80 फीट की दीवार, पिता बोले- मेरी बात मान लेता तो जिंदा होता मेरा लाल

Tue, 02 Jun 2026 09:00 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, अनूपशहर

सार

हादसे की खबर मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। अस्पताल पहुंचे पिता श्यामलाल का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि मैंने विक्रम को अनूपशहर मजदूरी पर जाने से मना किया था। 
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विक्रम पर गिरी दीवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के बुलंदशहर स्थित अनूपशहर कस्बे के अलीगढ़ रोड पर मंगलवार देर शाम एक बड़ा हादसा हो गया। यहां एक लकड़ी की टाल की करीब 80 फीट लंबी भारी-भरकम दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे के नीचे दबने से वहां काम कर रहे एक 40 वर्षीय मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसा पड़ोस के खेत में चल रही नींव की खुदाई के कारण हुआ। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले और पुलिस बल में हड़कंप मच गया।

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संभल का रहने वाला था विक्रम
पुलिस के मुताबिक, संभल जिले के रजपुरा थाना अंतर्गत करकोड़ा गांव का रहने वाले विक्रम (40) पुत्र श्यामलाल यहां मजदूरी कर रहे थे। अलीगढ़ रोड पर सेवकचंद गुप्ता की लकड़ी की टाल है। बताया गया कि इसके ठीक बराबर में मजदूर नींव खोद रहे थे। इसी दौरान टाल की लेंटर और टीनशेड लगी दीवार अचानक ढह गई और विक्रम उसके नीचे दब गए। चीख-पुकार सुनकर दौड़े स्थानीय लोगों ने भारी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर विक्रम को बाहर निकाला और सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। विक्रम तीन भाइयों में सबसे बड़ा और अविवाहित था।

मालिक जगपाल को पुलिस ने किया तलब
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम प्रियंका गोयल, सीओ विकास प्रताप चौहान, कोतवाली प्रभारी जितेंद्र कुमार दुबे और राजस्व टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। टाल मालिक के बेटे राजीव गुप्ता ने बताया कि उनकी दीवार के बिल्कुल सटाकर उन्हें बिना जानकारी के गहरी नींव खोदी जा रही थी, जिससे दीवार जमींदोज हो गई। एसडीएम प्रियंका गोयल ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही जांच शुरू कर दी गई है। फार्म हाउस मालिक जगपाल सिंह को तलब किया गया है। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी और पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाएगा।
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पिता बोले- मेरी बात मान लेता तो बच जाती जान
हादसे की खबर मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। अस्पताल पहुंचे पिता श्यामलाल का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि मैंने विक्रम को अनूपशहर मजदूरी पर जाने से मना किया था। उससे कहा था कि घर पर ही रहकर खेतों में पानी लगा ले लेकिन वह नहीं माना और चला आया। अगर वह मेरी बात मान लेता, तो आज उसकी जान बच जाती।
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