दीघी गांव में कथा सुनाते व्यास।
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पहासू। गांव दीघी के नर्मदेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही भागवत कथा में पांचवें दिन श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा वाचक आचार्य हरिकांत महाराज ने कहा कि सदा सुख केवल भगवान के चरणों में है।
भगवान के सम्मुख और उनके शरणागत होने से आवागमन के बंधन से मुक्ति मिलती है। भागवत कथा से कल्याणकारी और कोई भी साधन नहीं है। इसलिए व्यस्त जीवन से समय निकालकर कथा को आवश्यक महत्व देना चाहिए। भागवत कथा अमृत के समान है। इसके सुनने से मनुष्य पूर्णता को प्राप्त हो जाता है। यह एक ऐसी औषधि है, जिससे जन्म-मरण का रोग मिट जाता है। भागवत कथा को पांचवां वेद कहा गया है, जिसे पढ़ सकते हैं और सुन सकते हैं।
कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्व पाप हारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी-किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। श्री कृष्ण का जन्म क्षत्रिय कुल में राजा यदुकुल के वंश में हुआ था।
कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं तथा गोवर्धन पर्वत लीला के बारे में बताया इस मौके पर भक्तों के बीच कढ़ी-चावल का प्रसाद बांटा गया। इस दौरान नैनसुख, उर्फ मन्हीराम, नेमपाल सिंह, राधेश्याम सैनी, कुवंरपाल, नैमपाल सैनी, कुलदीप, दीपक, दिव्यम, सुभाष चंद, कन्हैया लाल आदि का सहयोग रहा।