भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार ने बजट में किसानों को सिर्फ लुभावने सपने दिखाएं हैं। किसान फसल बीमा योजना को उन्होंने हवा-हवाई बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार फसल बीमा योजना को लेकर बड़े-बड़े सपने दिखा रहीं है।
मगर सच्चाई यह है कि किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल रहा और सरकार की मिलीभगत से बीमा की राशि को कंपनियां हजम कर रही हैं। सरकार का बजट में किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने का दावा सिर्फ दिखावा है। उन्होेंने बताया कि बीमा कंपनियों के खिलाफ आंदोलन चलाने और बजट की सच्चाई जानने के लिए 17 मार्च को भाकियू जंतर-मंतर पर बैठक करेगी।
सोमवार को टिकैत ने भूड़ स्थित एक होटल में पत्रकारवार्ता के दौरान यह बातें कहीं। वह शिकारपुर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने जा रहे थे। उन्होंने कहा कि किसान हित में रेलवे की तर्ज पर कृषि का अलग बजट बनना चाहिए। सड़क और पाइपलाइन बिछाने से किसान का भला नहीं होने वाला।
भाकियू चाहती है कि खेत को इकाई मान मौसम की मार से तबाह फसलों का आकलन कर मुआवजा मिले। पिछले साल फसलों के नुकसान का मुआवजा अभी तक नहीं मिला। फसल नुकसान आकलन को किसान आयोग का गठन हो। खेत के नुकसान का जायजा लेने को गूगल की मदद ली जाए। टिकैत ने कहा कि सरकार ने दाल की खेती को 500 करोड़ जारी किए हैं, इसका भी किसानों को लाभ नहीं मिलेगा।
दाल की फसल को बढ़ावा देना है तो सरकार खरीद की गारंटी और रेट के साथ फसल बर्बाद करने वाले जानवरों को मारने की इजाजत दे। भाकियू गन्ने के भुगतान को लेकर ही जल्द रणनीति बनाएगी। भाकियू को मजबूत करने के लिए गांव-गांव में बैठकें की जाएंगी। इस दौरान मांगेराम त्यागी, जगतवीर सिरोही, कैप्टन यशवीर सिंह और कैप्टन बिशनपाल सिरोही मौजूद रहे।