जुबां पर बम-बम, पैरों में छाले, उत्साह से बढ़ रहे भोले के मतवाले
बुलंदशहर। कांवड़ यात्रा से जिले का वातावरण शिवमय हो गया है। हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। जुबां पर बम-बम भोले के जयकारे हैं तो पांव में छाले होने के बाद भी वह आगे बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार को शिवरात्रि है और जलाभिषेक के लिए भक्त तैयारी में जुट गए हैं।
गुलावठी में रविवार की सुबह से हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई। भगवान शिव की अनेक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। रविवार को बड़ी झांकियां भी गुलावठी से होकर गुजरी, जिन्हें देखने के लिए लोगों में काफी उत्साह था। वहीं, शिव भक्तों की सेवा में जगह-जगह भंडारे एवं सेवा शिविर आयोजित किए गए हैं। बुगरासी/स्याना। मंडल भाजपा के पदाधिकारियों ने हरिद्वार से 121 लीटर जल से भारी कांवड़ लेकर आ रहे शिवभक्त का स्वागत किया। कोतवाली क्षेत्र के गांव वैरा फिरोजपुर निवासी शिवभक्त शोभित त्यागी हरिद्वार से 121 लीटर जल से भारी कांवड़ लाए हैं। शोभित के स्याना क्षेत्र के गांव भैसोड़ा आने पर स्याना भाजपा मंडल द्वारा फूल माला एवं अंगवस्त्र पहना कर जोरदार स्वागत किया गया। मंडल उपाध्यक्ष विक्रांत त्यागी ने कहा की शोभित त्यागी की महादेव के प्रति श्रद्धा उल्लेखनीय एवं प्रेरणादायी है। शोभित इस जल को अपने गांव के ही शिव मंदिर में चढ़ाएंगे।
सहेली को पुत्र होने पर लाई कांवड़
नगर के भूड़ चौराहे से हरिद्वार से कांवड़ लेकर जा रही खुर्जा निवासी किरन उत्साह से आगे बढ़ रही थीं। जब उससे बातचीत की तो उसने बताया कि मेरी सहेली गुड़िया को तीन बेटी हुई। उसे बेटा न होने पर काफी उदास रहती थी। उसकी उदासी देखी नहीं गई और मन्नत मांग की यदि भगवान शिव मेरी सहेली को इस बार बेटा हुआ तो हरिद्वार से कांवड़ लेकर आऊंगी। शिव ने यह मन्नत पूरी कर ली तो कांवड़ लेकर आई हूं। किरन ने यह भी बताया कि मेरी भी एक बेटी है और इस बार जलाभिषेक कर भगवान से अपने लिए भी पुत्र प्राप्त की मन्नत मांगूंगी।
72 साल की उम्र में दिव्यांग पोते संग लाएं कांवड़
हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे खुर्जा क्षेत्र के गांव जाबल निवासी 72 वर्षीय गंगाराम से हुई। उनके साथ दिव्यांग संजय भी था, जो उनका पोता है। गंगाराम से जब बातचीत की तो उन्होंने बताया कि कभी कोई मन्नत तो नहीं मांगी, लेकिन अब तक 12 बार गोमुख और हरिद्वार से 25 बार कांवड़ ला चुका हूं। पोता संजय इस बार मेरे साथ तीसरी बार कांवड़ लेकर आया है। उन्होंने बताया कि अब बुढ़ापा होने के कारण पैदल नहीं चला जाता। इसलिए पिछले तीन साल से मैं साइकिल से और पोता संजय ट्राइसाइकिल से कांवड़ लेकर आ रहे हैं। आगे भी इसी तरह कांवड़ लेकर आएंगे।
70 वर्ष के पड़ाव में भी दंपती का उत्साह नहीं कम
ककोड़ क्षेत्र के गांव खेड़ा निवासी वीरेंद्र अपनी पत्नी मछला के साथ कांवड़ लेकर नगर से होकर गुजरे। उनकी उम्र को देखकर जब उनसे बातचीत की तो उन्होंने बताया कि हम पहली बार नहीं। वर्षों पहले से ही एक साथ कांवड़ लेकर आ रहे हैं। पहले कांवड़ हरिद्वार से लाते थे, लेकिन अब उम्र अधिक होने के कारण पिछले दो साल से अनूपशहर से कांवड़ लेकर जा रहे हैं। उनका कहना था कि इस उम्र में मन्नत की जरूरत नहीं है। बस भगवान शिव में आस्था होने के कारण यह पुनीत कार्य कर रहे हैं।
आज होगी सात किमी की परिक्रमा
गांव गंगेरूआ स्थित श्री द्वादश महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ की 7 किलोमीटर की परिक्रमा सोमवार सुबह प्रात: 6:00 बजे दी जाएगी। पीठ के संस्थापक आचार्य मनजीत धर्मध्वज ने बताया कि यह सिद्धमहापीठ मेदिनी ज्योतिष ने बताया कि इस दौरान हवन-यज्ञ और मंत्र आदि का जाप किया जाएगा। इस पीठ में संपूर्ण भारत वर्ष के तीर्थों की मिट्टी, कुंडों, सरोवरों, नदियों और समुद्रों के जल के साथ 12 शिवलिंग एवं सारे देवता और इष्ट दीक्षा केंद्र प्रतिष्ठित है। जिससे इसके दर्शन और परिक्रमा से सारे तीर्थों का फल प्राप्त होगा है