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सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा नहीं किया खारिज तो सड़क पर उतरेगा विपक्ष

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सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा नहीं किया खारिज तो सड़क पर उतरेगा विपक्ष
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बुलंदशहर। एक गैर समुदाय की महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में शनिवार को आरोपी पूर्व जिपं सदस्य के साथ ही उनकी जिपं सदस्य पत्नी और सपा नेता ने सत्ता पक्ष पर जानबूझकर मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के अंदर फर्जी मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो पूरा विपक्ष सड़क पर उतरकर धरना प्रदर्शन करेगा।
रविवार को भूड़ चौराहा स्थित एक होटल में जिपं सदस्य गीता चरौरा, पूर्व जिपं सदस्य सुनील चरौरा और सपा नेता पिंटू प्रमुख ने प्रेसवार्ता की। इस दौरान सुनील चरौरा ने कहा कि जिपं अध्यक्ष पद के लिए नामांकन शनिवार को किया जाना था। मेरी पत्नी गीता चरौरा भी नामांकन करने के लिए जाती। सत्ता पक्ष के इशारे पर नामांकन करने से रोकने के लिए पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का फर्जी मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें मेरी पत्नी को भी आरोपी बनाया है। कहा कि भाजपा के नेता इतने गिर गए हैं कि सामूहिक दुष्कर्म का फर्जी मुकदमा दर्ज कराते हुए मेरी पत्नी को भी गैंगरेप में सहयोग करने का आरोपी बनाया है, जबकि भारतीय सभ्यता के अनुसार कोई भी पत्नी ऐसा नहीं कर सकती है। जिपं सदस्य गीता चरौरा ने आरोप लगाया कि यदि सरकार को अपने काम पर भरोसा था तो वह सीधे चुनाव कराती। जिससे पता चल जाता कि किसमे कितना दम है। उन्होंने कहा कि मैंने मामले में राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायत की है, लेकिन यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर सपा नेता बादल यादव, हरीश लोधी समेत अन्य मौजूद रहे।
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विपक्षी दलों ने दिया सुनील को आश्वासन
सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी पूर्व जिपं सदस्य को विपक्षी दलों का साथ मिला। सुनील चरौरा ने बताया कि रविवार को पार्टियों के पदाधिकारियों ने उनसे फोन पर वार्ता की और आश्वासन दिया कि भाजपा के तानाशाही रवैये के खिलाफ वह उनके साथ खड़े हैं। जबकि समाजवादी पार्टी के नेता भी उनके संपर्क में हैं।
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सामूहिक दुष्कर्म किया तो क्यों नहीं की गिरफ्तारी
पूर्व जिपं सदस्य सुनील चरौरा ने कहा कि मेरे खिलाफ यदि सामूहिक दुष्कर्म जैसी वारदात का मुकदमा दर्ज किया गया तो मेरी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। जबकि पूरे दिन पुलिस ने मुझे हिरासत में रखा। वहीं मेरी पत्नी को भी सहयोगी बनाया है और पुलिस ने घर पहुंचकर उनसे बातचीत भी की, लेकिन सामूहिक दुष्कर्म की वारदात के बारे में कोई पूछताछ नहीं की। जिससे साफ है कि यह मुकदमा फर्जी तरीके से दर्ज किया गया है।
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