ई-रिक्शों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे अभियान के खिलाफ रिक्शा चालक बुधवार को सड़क पर उतर आए। रिक्शा चालक काला आम चौराहे से जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे और हंगामा-प्रदर्शन करने लगे। साथ ही प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया।
परिवहन विभाग ने पिछले साल ई रिक्शा संचालन को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। इसके हिसाब से अब ई-रिक्शा पंजीकृत फर्मों से खरीदा जा सकेगा। इसके लिए चेसिस नंबर होगा और इनको वाहन पंजीकृत नंबर आवंटित किया जाएगा। परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा को मोटर व्हीकल एक्ट में शामिल कर लिया है।
ऐसे में अपंजीकृत फर्म से खरीदे गए बिना चेसिस नंबर वाले ई-रिक्शे का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। ऐसे ई-रिक्शों को अवैध मानकर एआरटीओ प्रवर्तन और पुलिस धरपकड़ अभियान चला रही है। अब तक 100 से अधिक अवैध ई-रिक्शों को पुलिस जमा करा चुकी है। इससे खफा ई-रिक्शा चालक बुधवार को मलका पार्क में जमा हुए और जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे।
उन्होंने कलक्ट्रेट में जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मनमानी का आरोप लगाया। आरोप है कि नए ई रिक्शा की कीमत 1.35 लाख है। वह इतनी बड़ी रकम का बंदोबस्त कैसे कर पाएंगे। अनिल, सरताज, मुस्तकीम, सुनील, मनोज, रेवती, सलीम, अकरम आदि मौजूद रहे।
डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि जिस कंपनी से चालक नया ई रिक्शा खरीदेगा, वह कंपनी वेल्यू के हिसाब से चालक के पुराने ई रिक्शे की खरीद करेगी। यह रकम नए ई रिक्शे के मूल्य में एडजेस्ट हो जाएगी। बाकी रकम बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए बैंकर्स की बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी।
पंजीकृत फर्म में बने ई-रिक्शा ही अब देश में चल पाएंगे। ऐसे ई रिक्शों का पंजीकरण परिवहन संभाग में कराया जाएगा। अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। अब तक जो ई रिक्शे नगर क्षेत्र में चल रहे थे, पंजीकृत नहीं थे। ई रिक्शों की भीड़ छटने से शहर में जाम की समस्या भी खत्म हो जाएगी। - आंजनेय कुमार सिंह, डीएम