खुर्जा। जटिया चिकित्सालय में विशेषज्ञ नहीं होने के कारण 40 लाख रुपये की लागत से बना आईसीयू धूल फांक रहा है। इसमें आधुनिक मशीन और उपकरण के साथ 12 बेड की सुविधा है लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
सेठ सूरजमल जटिया चिकित्सालय में वर्ष 2023 में 12 बेड युक्त इंटेंसिव केयर यूनिट बन तैयार हुआ था। आईसीयू बनने पर लोगों ने राहत की सांस की ली थी कि सड़क हादसे में घायल या अन्य गंभीर मरीजों को अब निजी चिकित्सालय या जिला अस्पताल के चक्कर नहीं काटने होंगे। प्रबंधन की मानें तो विशेषज्ञ व कर्मचारियों की कमी के कारण आईसीयू शुरू नहीं हो सका।
आईसीयू में ऑक्सीजन लाइन के साथ बीपी, पल्स, एसपीओ और हृदय गति को मापने के लिए डिजिटल मीटर और स्क्रीन, आधुनिक बेड, वार्ड को बैक्टिरिया रहित करने के लिए एसी व अन्य मशीन और उपचार के सभी उपकरण उपलब्ध हैं। जो पिछले दो साल से किसी के उपयोग में नहीं आ रहे हैं।
आईसीयू चालू नहीं होने के कारण मरीजों को तुंरत उपचार नहीं मिल पाता है। उनकी मौत होने का खतरा ज्यादा रहता है। अनुज के भाई सुमित नादल का कहना है कि यदि जटिया अस्पताल में उपचार मिल जाता तो अनुज ठीक होता और शोभित को मेरठ जाना नहीं पड़ता। इसके अलावा दो महीने पहले एक घायल सुरक्षाकर्मी को जटिया अस्पताल में लाया गया, जहां से उनको कैलाश अस्पताल रेफर किया गया जहां उनकी मौत हो गई।
30 बेड का वार्ड भी पड़ा है बंद
वर्ष 2023 में ईसीआरपी के अंतर्गत 20 लाख रुपये की लागत से 30 बेड का सामान्य वार्ड भी बनाया गया था, वह भी अभी तक चालू नहीं हो सका है। इसके चालू हो जाने से अन्य वार्ड में मरीजों की भीड़ कम होगी।
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Iअस्पताल में कार्यरत एक चिकित्सक और तीन स्टाफ नर्स मेरठ में तीन माह के प्रशिक्षण के लिए गए हैं। प्रशिक्षण के बाद उनको आईसीयू में नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद आईसीयू चालू होगा। डॉ. अनिल शर्मा, सीएमएसI