बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओ, सरकार का यह स्लोगन अफसरों की उदासीनता से दम तोड़ रहा है। एक पिता अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है तो अफसर उदासीन होकर तमाशा देख रहे हैं।
अस्पताल में भर्ती होने और तबीयत में लगातार गिरावट के बावजूद वह भूख हड़ताल पर हैं। प्रशासन का कोई नुमाइंदा बेटी का एडमिशन तो दूर उसका हाल जानने भी नहीं पहुंचा। जिला अस्पताल के बिस्तर पर पड़े पिता अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए अब झुकने को तैयार नहीं हैं।
जहांगीराबाद के मोहल्ला छैपियान निवासी अशोक शर्मा स्कूल प्रबंधन द्वारा बेटी का एडमिशन नहीं करने के खिलाफ आठ फरवरी से कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे थे। उनका आरोप है कि एडमिशन के लिए डोनेशन की मांग की जा रही थी। पेशे से दर्जी अशोक शर्मा ने बताया कि उसकी पत्नी का देहांत सात साल पहले हो गया था।
उसकी दो बेटियां हैं, जिन्हें वह पढ़ा-लिखकर अफसर बनाना चाहते हैं। 14 वर्षीय बड़ी बेटी उमा शर्मा के एडमिशन के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा डोनेशन की मांग की जा रही थी। धन नहीं देने पर बेटी का एडमिशन नहीं किया गया।
आरोप है कि उन्होंने जब स्कूल प्रबंधन से इसे लेकर आपत्ति जताई तो उसके साथ अभद्रता की गई। बेटी के एडमिशन के लिए अशोक ने पिछले सोमवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका।
इसके बाद वह भूख हड़ताल पर बैठ गए। बुधवार को हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी भूख हड़ताल जारी है।
डॉक्टरों के लाख समझाने के बावजूद उन्होंने कुछ भी खाने-पीने से इंकार कर दिया। पिता का कहना है कि जब तक बेटी को एडमिशन नहीं मिलेगा, वह भूख हड़ताल जारी रखेंगे।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीके सिंघल ने बताया कि अशोक का वजन काफी घट गया है। ब्लड प्रेशर तेजी से घट रहा है। यदि अशोक ने खाना-पीना नहीं शुरू किया गया तो उसकी हालत गंभीर हो सकती है।
वहीं, डीआईओएस रामाज्ञा कुमार ने बताया कि एडीएम ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। स्कूल प्रबंधन से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।