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Bulandshahar News: ग्रैप वन... पाबंदियां हवाई, शहर में उड़ रही धूल, खेतों से उठ रहा धुआं

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कृ​​षि विभाग कार्यालय परिसर में कूड़े के ढेर को आग के हवाले करता कर्मचारी। संवाद - फोटो : Archive
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बुलंदशहर। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ते ही बुधवार शाम से बुलंदशहर में ग्रैप वन यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान लागू कर दिया गया। कागजों पर 21 तरह के प्रदूषण फैलाने वाले कार्यों पर रोक लगा दी गई है।
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प्रदूषण नियंत्रण विभाग समेत 19 विभागों को हवा साफ रखने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन हकीकत में स्थिति पहले जैसी ही है। जिले में न तो निर्माण कार्यों पर रोक का असर दिख रहा है और न ही पराली जलाने की घटनाएं बंद हुई हैं।
सड़कों पर भी पहले की तरह धूल उड़ रही है। बृहस्पतिवार को शहर का एक्यूआई 200 रहा, जो मध्यम श्रेणी में है। जिला प्रशासन ने ग्रैप के तहत प्रदूषण नियंत्रण विभाग, नगर निकायों, कृषि विभाग, ट्रैफिक पुलिस, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, एनएचएआई, स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग समेत करीब 19 विभागों को निर्देश जारी किए हैं।
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अधिकारियों के अनुसार, वाहनों की अत्यधिक आवाजाही, छोटे-बड़े वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों, खुले में कूड़ा-कचरा जलाने, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं, धूल और बालू के साथ ही खुले में निर्माण सामग्री पड़ी रहने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए ही ग्रैप लागू किया गया है।
जिस पर जागरूकता की जिम्मेदारी वही जला रहे कूड़ा
ग्रैप का पहला चरण लागू होने के बाद पहले ही दिन व्यवस्था की पोल खुल गई। बृहस्पतिवार को कृषि विभाग के कार्यालय परिसर में ही एक कर्मचारी ने कूड़े और सूखी घास में आग लगा दी। जिस विभाग पर किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करने की जिम्मेदारी है, उसी के परिसर में कूड़ा जलाया जा रहा था। यह सिर्फ एक जगह की तस्वीर नहीं है। जिले में खेतों में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। सड़कों पर निर्माण सामग्री खुले में पड़ी है और भवन निर्माण के दौरान धूल उड़ रही है। सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए नगर निकायों के अधिकारियों को पत्र भेजा गया है, लेकिन सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है।
पराली जलाने का वीडियो वायरल
सूरजावली गांव के पास खेत में पराली जलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इससे स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो शिकारपुर-पहासू मार्ग पर स्थित दूध प्लांट के पीछे का बताया जा रहा है। कृषि उप निदेशक बबलू कुमार ने बताया कि किसानों को पराली नहीं जलाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। वीडियो की जांच के लिए शुक्रवार को टीम भेजी जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए चार चरण किए निर्धारित
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी क्षितिज पटेल ने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक्यूआई के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए चार चरण निर्धारित किए हैं। एक्यूआई 201 से 300 के बीच होने पर पहली स्टेज लागू होती है। हालांकि, बुलंदशहर में अभी एक्यूआई 200 है लेकिन एनसीआर के दूसरे शहरों में अधिक होने पर ग्रैप वन की पाबंदियां यहां भी लागू हो गईं हैं। इसमें खुले में कूड़ा जलाने और वाहनों से धुआं निकलने पर कार्रवाई की जाती है। एक्यूआई 301 से 400 के बीच पहुंचने पर दूसरी स्टेज लागू होती है, जिसके तहत धूल पैदा करने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाता है। आंकड़ा 401 से 450 के बीच होने पर तीसरी स्टेज लागू होती है। इसमें लोगों को निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए प्रेरित किया जाता है। कोयले और लकड़ी के बजाय बिजली के हीटर का इस्तेमाल करने के प्रति जागरूक किया जाता है। 450 से अधिक एक्यूआई होने पर चौथी स्टेज लागू होती है। इस स्तर पर वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को गंभीर परेशानी हो सकती है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय अधिकारी क्षितिज पटेल का कहना है कि बढ़ते एक्यूआई पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। नगर निकायों को भी पानी का छिड़काव बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे नियमित निरीक्षण करें।

कृषि विभाग कार्यालय परिसर में कूड़े के ढेर को आग के हवाले करता कर्मचारी। संवाद- फोटो : Archive

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