वर्षों से सूने पड़े निसंतान दंपति के आंगन को अब बिटिया महकाएगी। पांचवी बेटी होने पर अस्पताल में छोड़कर आने वाले दंपति ने बिटिया को स्वेच्छा से इस निसंतान दंपति को गोद दे दिया है।
बिटिया का नाम परी रखा गया है। परी के माता-पिता का सपना है कि वह डॉक्टर बने। पांचवी बेटी होने पर अस्पताल में छोड़कर आने वाले दंपति ने अपनी बिटिया को जहांगीराबाद के मोहल्ला पाठक निवासी रेनू गोयल पत्नी दीपक गोयल को दे दिया।
निसंतान रेनू और दीपक ने बिटिया को पाने के लिए कोर्ट में भी याचिका दी थी, लेकिन पिता की याचिका के बाद बिटिया उसे दे दी गई थी।
निसंतान दंपति ने बिटिया पाने की ख्वाहिश जब उसके पिता को बताई तो पिता ने इसके लिए हामी भर दी। परिजनों और स्थानीय लोगों ने भी पिता का समर्थन किया।
पिता ने अपनी बिटिया रेनू और दीपक की गोद में दे दी। नन्हीं बिटिया अब रेनू और दीपक के आंगन का फूल बनेगी। बिटिया की यशोदा मां ने उसका नाम परी रखा है।
परी के माता-पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते हैं। पेशे से शिक्षक दीपक गोयल ने बताया कि बेटी पाकर उन्हें बेहद खुशी है। गोद लेने की औपचारिकताएं शुक्रवार को पूरी की जाएंगी।
अस्पताल पर लटकी एफआईआर की तलवार
जांच में सहयोग नहीं कर रहे निजी अस्पताल संचालक पर एफआईआर की तलवार लटक गयी है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के बाद जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष आशा कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। अध्यक्ष ने बताया कि यदि अस्पताल संचालक ने जांच में सहयोग नहीं किया तो एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।