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दस लाख रुपये के लोन के लिए सफाई कर्मी बना डीपीआरओ, निलंबित

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दस लाख रुपये के लोन के लिए सफाई कर्मी बना डीपीआरओ, निलंबित
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बुलंदशहर। जनपद में एक ग्रामीण सफाई कर्मी बैंक से 10 लाख रुपये के लोन लेने के लिए खुद ही जिला पंचायतीराज अधिकारी बन गया। इतना ही नहीं उसने बैंक से लोन लेने के लिए आवेदन पत्रों में तत्कालीन डीपीआरओ के हस्ताक्षर भी खुद कर दिए। शिकायत मिलने पर उसे नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उसके खिलाफ जांच के लिए भी आदेश जारी कर दिए गए हैं।
अनूपशहर तहसील क्षेत्र के गांव श्योरामपुर जिनाई ग्राम पंचायत पर तैनात ग्रामीण सफाईकर्मी विमलेश सिंह ने एक बैंक से 10 लाख रुपये का लोन लेने के लिए आवेदन किया था। नियमानुसार इस पर जिला पंचायतीराज अधिकारी के भी हस्ताक्षर की जरूरत थी। आरोप है कि उसने बैंक में लोन के लिए जमा किए आवेदन पत्रों आदि दस्तावेजों पर तत्कालीन डीपीआरओ अमरजीत सिंह के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए और सील भी फर्जी लगा दी। इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों को 23 अक्तूबर 2020 को मिली। जांच पड़ताल करने पर पूरा मामला आइने की तरह साफ हो गया। इस पर विभाग की ओर से सफाईकर्मी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। लेकिन उक्त सफाईकर्मी ने विभाग की नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। इस पर जिला पंचायतीराज अधिकारी की ओर से सफाईकर्मी विमलेश सिंह को लोन संबंधित आवेदन पर तत्कालीन डीपीआरओ के फर्जी हस्ताक्षर करने, अपने कर्तव्यों एवं दायित्व का निर्वहन नहीं करने और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। मौजूदा डीपीआरओ ने बताया कि निलंबित किए गए सफाई कर्मी की जांच के लिए भी आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही अन्य विभागीय कार्रवाई भी कर दी गई है।
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बैंक से आई फाइल से खुला मामला
सफाई कर्मी विमलेश सिंह ने स्टेट बैंक की अनूपशहर शाखा में लोन के लिए आवेदन किया था। विभागीय अफसरों ने बताया कि जब बैंक से लोन संबंधित फाइल सत्यापन के लिए विभाग को मिली तो पूरा मामला खुल गया। आवेदन आदि में दर्ज हस्ताक्षरों की जांच की गई तो वह तत्कालीन डीपीआरओ अमरजीत सिंह के हस्ताक्षर से मेल हुआ। यदि बैंक से सत्यापन के लिए फाइल नहीं मिलती तो सफाईकर्मी अपने कारनामे को अंजाम देने में कामयाब हो जाता।
लोन लेने वाले सभी सफाईकर्मी रडार पर
तत्कालीन डीपीआरओ के हस्ताक्षर कर लोन लेने के लिए आवेदन करने का मामला उजागर होने के बाद विभागीय अधिकारी सजग हो गए हैं। अब अफसरों ने बैंक से लोन लेने वाले सभी सफाई कर्मियों की ब्लॉक से सूची मांग ली है। सूची मिलने पर संबंधित बैंकों में लगाए गए कागज आदि की जांच होगी। इसके लिए बैंकों का भी सहयोग लिया जाएगा। जिला पंचायतीराज अधिकारी ने बताया कि सफाई कर्मी द्वारा स्वयं फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक से लोन लेने का मामला गंभीर है। इस मामले का खुलासा होने पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो गए हैं। अब बैंक से लोन लेने वाले सभी कर्मियों की जांच होगी। ताकि सच्चाई का पता किया जा सके। बता दें कि जनपद की 951 ग्राम पंचायतों में शासन की ओर से ग्रामीण सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं।
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बैंक से लोन लेने के लिए कागजों पर तत्कालीन डीपीआरओ के फर्जी हस्ताक्षर बनाने का मामला सामने आने पर संबंधित सफाईकर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उसके खिलाफ जांच के भी आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं, दूसरी ओर बैंक से लोन लेने वाले अन्य कर्मियों के कागजात आदि की जांच के लिए भी आदेश जारी कर दिए हैं।
नंदलाल, जिला पंचायती राज अधिकारी
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