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आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए मिली 69 लाख की राशि में गोलमाल

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आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए मिली 69 लाख की राशि में गोलमाल
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बुलंदशहर। बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों में खेल किट और फर्नीचर खरीद के लिए मिली करोड़ों की राशि में गोलमाल की अभी जांच अधर में लटकी हुई है। वहीं, अब आत्मरक्षा प्रशिक्षण को मिली 69 लाख रुपये की राशि में गोलमाल का एक और मामला उजागर हो गया। इस पूरे प्रकरण पर जांच बैठ गई है। डीएम ने इसकी जांच के लिए एडीएम को जांच अधिकारी बनाया है।
वर्ष 2019 में शासन ने उच्च प्राथमिक स्कूली छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने के लिए 69.21 लाख रुपये की राशि जारी की थी। इस राशि से विभागीय अफसरों को पहले मास्टर ट्रेनर और व्यायाम शिक्षक आदि को प्रशिक्षण दिया जाना था। विभागीय अफसरों ने उस समय इस राशि से छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने का बार-बार दावा किया था। लेकिन अब गत दिनों एक मास्टर ट्रेनर और ब्लॉक व्यायाम शिक्षक हरकेश सिंह ने शासन को शिकायत कर इस पूरे मामले में गोलमाल का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। आरोप है कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण में फर्जी उपस्थिति पंजिका बनाकर विभागीय अफसरों ने शासन को भेजी थी। बाद में उपस्थिति पंजिका के रजिस्टर गायब हो गए और इस राशि से न तो मास्टर ट्रेनर और व्यायाम शिक्षक आदि को और न ही छात्राओं को स्कूल में प्रशिक्षण दिया गया। शासन से छात्राओं के हित में जारी की गई 69.21 लाख रुपये की राशि में गोलमाल किया है। हरकेश सिंह ने शासन को शिकायत पर इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग की थी। शिकायत मिलने पर शासन ने मेरठ मंडल के कमिश्नर को अवगत करवाते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे। कमिश्नर ने उक्त मामले की जांच के लिए जनपद के डीएम रविंद्र कुमार को पत्र लिखा। कमिश्नर का पत्र मिलने पर डीएम ने पूरे मामले की जांच के लिए एडीएम प्रशासन रवींद्र कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया है। इस प्रकरण की जांच शुरू होते ही बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालय में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। चर्चा यह भी है कि उक्त मामले में एक एबीएसए की अहम भूमिका रही है। यदि जांच सही तरीके से हुई तो इस राशि के गोलमाल में बीएसए से लेकर कई अधिकारियाें के कारनामों की पोल खुलकर सामने आ जाएगी।
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छात्राओं को सशक्त करने का सपना भी रह गया अधूरा
शासन ने छात्राओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की दिशा में अहम कदम उठाया। लेकिन जनपद में इतनी बड़ी राशि जारी करने के बाद भी न तो मास्टर ट्रेनर और व्यायाम शिक्षक आदि को प्रशिक्षण दिया गया और न ही छात्राओं को इसका लाभ मिला। ऐसे में छात्राओं को सशक्त बनाने का सपना भी अधूरा रह गया। इतना ही नहीं विभागीय अफसरों ने इस पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास किया और शासन को भी गुमराह करने का काम किया है।
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आत्मरक्षा प्रशिक्षण के संबंध में किसी ने शासन को शिकायत की है। डीएम की ओर से इसकी जांच के आदेश जारी हो गए हैं। जांच के बाद ही लगाए गए आरोपों का खुलासा होगा। जांच अधिकारी को जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
- अखंड प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी।
बेसिक शिक्षा के उक्त मामले की जांच के लिए डीएम की ओर से मुझे जांच अधिकारी बनाया है। जल्द ही इसकी जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।
- रवींद्र कुमार, एडीएम प्रशासन
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