87 वर्षीय दिगंबर सिंह निवासी गांव असदपुर घेढ़, मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे घर पर चाय-नाश्ता करने के बाद अपने घेर पर गए थे। घर से घेर की दूरी महज 300 मीटर है। सुबह करीब दस बजे जब पड़ोसी नीरज किसी काम से उनके घेर पर पहुंचा, तो वहां दिगंबर सिंह जमीन पर खून से लथपथ हालत में पड़े थे और उनकी गर्दन से खून बह रहा था। जिसे देख उसने शोर मचाया और चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण और परिजन मौके पर एकत्र हो गए।
आनन-फानन वृद्ध को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, गर्दन पर धारदार हथियार से वार के निशान नजर आ रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही थाना डिबाई पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल को सील कर फोरेंसिक टीम को बुलाया, जिसने मौके से फिंगरप्रिंट्स और अन्य साक्ष्य जुटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
दिगंबर सिंह गांव के एक सम्मानित व्यक्ति थे। वह वर्ष 1998 में एडीओ पंचायत के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। प्रशासनिक अनुभव होने के कारण ग्रामीणों में उनकी अच्छी पैठ थी, जिसके चलते वह वर्ष 2010 से 2015 तक गांव के प्रधान भी रहे। उनके दो पुत्रों में बड़ा बेटा अशोक कुमार अलीगढ़ में अधिवक्ता है, जबकि छोटा बेटा बालकिशन गांव में ही रहकर पिता के साथ खेती-बाड़ी संभालता है। दिगंबर सिंह की पत्नी का निधन काफी पहले वर्ष 1994 में हो चुका था।
इस घटना ने उन्हें जीते जी मार दिया था
पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक दुखद पहलू यह भी सामने आया है कि मृतक दिगंबर सिंह पिछले कुछ समय से गहरे मानसिक तनाव में थे। परिजनों ने बताया कि कुछ समय पूर्व उनके दामाद तेजेंद्र सिंह, जो बुलंदशहर के स्याना अड्डा के पास रहते थे, की नोएडा से लौटते समय एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इस भीषण हादसे में दिगंबर सिंह के धेवते ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। एक साथ दामाद और धेवते को खोने के गम ने उन्हें तोड़कर रख दिया था।
पूर्व प्रधान की मौत की सूचना पर पुलिस टीम ने मौके का मुआयना किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फोरेंसिक टीम साक्ष्य संकलित कर रही है। अभी तक परिजनों की ओर से तहरीर प्राप्त नहीं हुई है, तहरीर मिलते ही वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का सही कारण स्पष्ट हो सकेगा। - मधुप कुमार सिंह, सीओ डिबाई