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Bulandshahar News: खेतों से निकाली आत्मनिर्भरता की राह

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महिला किसान उर्मिला चौधरी।
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बुलंदशहर। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के बीच जिले की महिला किसान भी अपने परिश्रम, हौसले और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कोई उन्नत बीज तैयार कर रही है तो कोई जैविक खेती और कृषि उत्पादों के जरिये देश-विदेश में पहचान बना रही हैं।
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महिला समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से ये महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी खेती-किसानी से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। इन्हीं में से कुछ नाम हैं उर्मिला चौधरी, संतोष राजपूत, आंचल चौधरी, ममतेश रानी और शशि बाला का। जो यह साबित कर रही हैं कि खेती अब केवल परंपरागत काम नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और उद्यम का मजबूत माध्यम भी है।
किसान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटीं उर्मिला
सेगा जगतपुर गांव की प्रगतिशील किसान उर्मिला चौधरी गेहूं, धान और गन्ने की खेती के साथ उन्नत बीज उत्पादन भी करती हैं। जैविक खेती और पशुपालन भी उनके काम का हिस्सा हैं। उन्होंने महिलाओं का समूह बनाया है, जिसके माध्यम से महिलाओं से गन्ने की पौध तैयार कराई जाती है।
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पौध की बिक्री से महिलाएं बेहतर आय अर्जित कर रही हैं। उर्मिला की इस पहल से अब तक 500 से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ चुकी हैं। कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
जैविक उत्पादों की विदेशों तक पहचान
डिबाई क्षेत्र के खेड़िया बख्श गांव की संतोष राजपूत ने जैविक खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी जैविक सब्जियों, चावल और मोटे अनाज से तैयार उत्पादों की मांग देश के साथ विदेशों में भी है। वर्ष 2020 में उन्होंने खेती के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की।
इसके लिए कृषि उत्पादक समूह बनाया और सात्विक एग्रो वायो एनर्जी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना की। आज उनके साथ क्षेत्र की एक हजार से अधिक महिलाएं और किसान जुड़े हैं। उनकी जैविक सब्जियों का निर्यात स्विट्जरलैंड और जापान तक होता है, जबकि कतर में उनके जैविक चावल की मांग है। उनके समूह को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी सम्मानित कर चुके हैं।
खेती के साथ जैविक उत्पाद तैयार कर रहीं आंचल
शिकारपुर क्षेत्र के गांव गांव सलेमपुर की मूल निवासी और वर्तमान में बुलंदशहर के आवास विकास द्वितीय में रहने वाली प्रगतिशील किसान आंचल चौधरी खेती-किसानी के साथ किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का संचालन करती हैं। वह जैविक उत्पादों के साथ घरेलू उपयोग और खेती से संबंधित उत्पाद भी तैयार कर रही हैं।
फूलों की खेती से जुड़े उत्पादों से बायो-एंजाइम तैयार करने का काम भी करती हैं। उनके प्रयासों से कृषि आधारित उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। साथ ही वह दूसरी किसान महिलाओं को इसका हुनर सिखा रही हैं।
जैविक खेती के साथ सब्जियों और फलों की कर रहीं खेती
ऊंचागांव ब्लॉक के फरीदा बांगर गांव की शशि बाला जैविक खेती के जरिये आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। वह प्याज सहित विभिन्न सब्जियों और दालों की खेती करती हैं। उनके बगीचे में अमरूद, जामुन, आलूबुखारा और आम के पेड़ भी हैं।
वह वर्मी कंपोस्ट और जैविक कीटनाशक तैयार कर खेती में उपयोग करती हैं। उनके प्रयासों से दूसरी महिलाएं भी जैविक खेती और कृषि उत्पाद तैयार करने के लिए प्रेरित हो रही हैं। शशि बाला का उद्देश्य महिलाओं को प्राकृतिक खेती से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
ड्रोन से खेती कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं ममतेश
स्याना क्षेत्र के गांव सहरा निवासी ममतेश रानी आधुनिक खेती की मिसाल बनकर उभरी हैं। वह खुद खेती करने के साथ ड्रोन चलाकर कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। इतना ही नहीं, वह गांव की अन्य महिलाओं को भी आधुनिक खेती के गुर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।
कृषि क्षेत्र में उनके सराहनीय योगदान और महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों के लिए पिछले वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से उन्हें 75 हजार रुपये की सम्मान राशि देकर पुरस्कृत किया गया था।

महिला किसान उर्मिला चौधरी।

महिला किसान उर्मिला चौधरी।

महिला किसान उर्मिला चौधरी।

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