जोर-शोर से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में तय किया गया ई-रिक्शा का रूट प्लान पहले ही दिन फेल हो गया। शहर में न तो रूट के हिसाब से ई-रिक्शा चले और न ही चिह्नित स्थानों पर खड़े हुए।
खास बात यह है कि, अफसरों ने तो कागजों में रूट प्लान तय कर दिया, मगर इसके क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
गौरतलब है कि डीएम की अध्यक्षता में नगर पालिका अफसरों, पुलिस अफसरों और एआरटीओ की बैठक में नगर क्षेत्र में ई-रिक्शों के रूट (कलर के हिसाब से), उनकी पार्किंग तय किए गए थे।
नाबालिग के हाथ में ई-रिक्शा की कमान नहीं होने से लेकर कई अन्य प्लानिंग की गई। दावा किया जा रहा था इस योजना से शहर में जाम से निजात मिल जाएगी। एक फरवरी से इस योजना को धरातल पर उतारना था।
मगर पहले ही दिन तय की गई रणनीति धरातल पर नजर नहीं आई। किसी भी चिह्नित स्थान पर ई-रिक्शा खड़े नहीं हुए। न ही कोई ई-रिक्शा तय रूट पर चलता पाया गया।
इसके अलावा नाबालिगों के हाथ में ई-रिक्शा देखे गए। पुलिस चौकी के सामने ही ई-रिक्शा खड़े रहे। न तो कोई पुलिसकर्मी, न पालिका अफसर और न ही एआरटीओ विभाग के अधिकारी ई-रिक्शा संचालकों के खिलाफ कोई अभियान चलाते मिले। अफसरों की नजरअंदाज करने से ई-रिक्शा संचालक प्रशासन के आदेशों को खुलेआम तोड़ते रहे।
अफसरों ने दिखाए थे तेवर
बैठक में संबंधित अफसरों ने तेवर ऐसे दिखाए थे जैसे अगले दिन ही अभियान शुरू कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी के समक्ष अफसरों ने बड़े-बड़े दावे भी किए थे। बड़े-बड़े सुझाव रखे लेकिन अमल करने में बंगले झांकते दिखे।
नगर पालिका स्टाफ अतिक्रमण हटाने में व्यस्त रहा। मंगलवार से सख्ती से आदेश लागू किया जाएगा। ई-रिक्शों के लिए जारी की गई गाइडलाइन का अनुपालन कराने के निर्देश कर्मियों को दिए गए हैं। जल्द ही पंजीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। - एके सिंह, ईओ, नगर पालिका
डीएम के निर्देश के बाद नगर पालिका को सहयोग करेंगे। रूट से अलग ई-रिक्शा चलाए जाने पर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - सुरेंद्र सिंह, एआरटीओ