काले धन को सफेद बनाने में मिनी और माइक्रो फाइनेंस कंपनियां जुट गई हैं। मिनी और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का बाजार में 100 करोड़ रुपये से अधिक बंटा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि फाइनेंस कंपनियों के कर्ताधर्ता लोगों से कर्ज की धनराशि नई करेंसी नोट में मांग रहे हैं।
जनपद में 40 से अधिक मिनी और माइक्रो फाइनेंस कंपनियां हैं। फाइनेंस कंपनियां खासतौर पर गरीब और मध्यम तबके को छोटा कर्ज देती हैं। कर्ज मासिक और साप्ताहिक किश्तों के रुप में चुकाना होता है। नौ नवंबर से 500 और 1000 का नोट बंद होने के बाद जिन लोगों ने फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लिया था, वह अब पुरानी करेंसी नोट में कर्ज चुकाना चाहते हैं।
मगर फाइनेंस कंपनियां पुरानी करेंसी नोट (500-1000 का नोट) को स्वीकार नहीं कर रही है। स्टॉलमेंट में भी नया करेंसी नोट मांगा जा रहा है। पिछले दिनों महिलाओं ने कलक्ट्रेट में मिनी और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। मगर फिर भी कोई हल नहीं निकला।
एक्सपर्ट सुनील राय के मुताबिक यदि फाइनेंस कंपनियां पुराने 500 और 1000 के नोट लेंगी तो उनको रिकार्ड में दर्शाना पड़ेगा। नए नोट बाजार से मिलने पर किसी रिकार्ड में दिखाने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने डीएम से पिछले दिनों में जनपद में कारोबार कर रही मिनी और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की सूची मांगी थी।