वाजिब मुआवजे की मांग को लेकर 12 गांवों के किसानों ने रविवार को चोला जंक्शन के पास रेलवे ट्रैक के किनारे महापंचायत की।
आक्रोषित किसानों ने चार गुना मुआवजा नहीं मिलने तक कृषि भूमि पर रेलवे को कब्जा नहीं देने की चेतावनी दी। इस मौके पर ट्रेनें रोकने और अफसरों को खदेड़ने का रणनीति पर भी चर्चा हुई।
रेलवे ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर के लिए चोला क्षेत्र के 12 गांवों की जमीन अधिग्रहीत की थी। किसानों का कहना है कि रेलवे ने जमीन का वाजिब मुआवजा नहीं दिया।
खफा किसानों ने रविवार को चोला जंक्शन के पास रेलवे ट्रैक के किनारे महापंचायत की।खबरा, खानपुर, नगला बंसी, गांगरौल, समसपुर, दोसपुर, खुर्जा जंक्शन, फतहपुर जादों, धनौरा, रौनी, भौरा, फतहपुर मकरंदपुर।
इन गांवों के किसान ट्रैक्टर ट्राली मे सवार होकर महापंचायत में पहुंचे थे। किसान सुग्रीव ने कहा कि रेलवे ने सस्ती दरों पर किसानों की जमीन छीनी है। रोजगार और विकास के सब्जगाज दिखाकर किसानों की जमीन हड़प ली गई। समय मुआवजा राशि बांटने का आया तो रेलवे अफसरों ने मनमानी शुरू कर दी।
रेलवे को यमुना एक्सप्रेस वे की तर्ज पर मुआवजा देना होगा। इससे कम मुआवजा किसानों को मंजूर नहीं है। किसान सुंदर सोलंकी ने कहा कि चार गुना मुआवजा लिए बगैर किसान पीछे नहीं हटेंगे। वैर प्रधान मनबीर ने कहा कि रेलवे ने कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा कर लिया है।
ग्रामीणों को न तो मुआवजा ही दिया गया और न ही कब्रिस्तान के लिए जमीन आवंटित की गई। सिकंदराबाद विधायक विमला सोलंकी, पूर्व विधायक वीपी सिंह, बिजेंद्र प्रताप सिंह ने पंचायत में पहुंचकर समर्थन किया। किसान अजय, अतर सिंह, सुंदर सोलंकी नवल सिंह, सूरवीर, मनवीर, सुशील प्रधान, सुग्रीव, जंग बहादुर, राकेश भाटी, इंद्रमणि शर्मा और रमेश आदि मौजूद रहे। पंचायत का संचालन अजय चौधरी और अध्यक्षता रघुनाथ सिंह ने की।