पांच मांग पूरी नहीं होने से खफा किसान बुधवार को डीएम कार्यालय के बाहर गेट के सामने जमीन पर लेट गए। किसानों ने पुलिस की मौजूदगी में गेट को रस्सियों से बांधकर बंद कर दिया।
परीक्षण करने पहुंचे डाक्टर को खरीखोटी सुनाकर लौटा दिया। सिटी मजिस्ट्रेट से भी नोकझोंक हुई। डीएम ने किसानों के पास आकर ज्ञापन लिया। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन तानाशाह हो गया है, एकजुट होकर आने वाले फरियादियों खासकर किसानों को कलक्ट्रेट में आने से रोक दिया जाता है।
भाकियू के बैनर तले किसान पेमेंट में देरी, गन्ना समर्थन मूल्य घोषित नहीं होने, बिजली की बढ़ी दर, मुआवजा वितरण में मनमानी और वेव शुगर मिल की बंदी के विरोध में कई दिन से कलक्ट्रेट में बेमियादी धरने पर बैठे हुए हैं।
आरोप है कि प्रशासन के अधिकारी किसानों को अनसुना कर रहे हैं। इसी से नाराज किसान दोपहर करीब 12 बजे डीएम दफ्तर के बाहर पहुंचे और गेट के सामने वहीं लेट गए। किसानों ने गेट को भी रस्सियों से बांधकर बंद कर दिया।
एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट डीपी सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं मानें। किसानों की अफसरों से नोकझोंक हुई।
खुफिया विभाग के एक दारोगा और धरनारत किसानों के स्वास्थ्य की परीक्षण करने पहुंचे एक सरकारी डाक्टर (फार्मसिस्ट) से किसानों की बहस हुई। किसानों ने परीक्षण नहीं कराया। बाद में डीएम बीं चंद्रकला किसानों से बात करने पहुंची।
डीएम के आते की भाकियू पदाधिकारियों ने कहा कि साफ सुधरे किसान डीएम साहब को ज्ञापन दें। शायद उन्हें किसानों की भीड़ से बदबू आती है, इसी कारण किसानों को कलक्ट्रेट के गेट के बाहर रोकने का चलन बढ़ा गया है।
अंदर आने को लेकर किसान और अफसरों के बीच रोज तकरार होती है लेकिन अफसरों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। प्रशासनिक अधिकारी पुलिस से आम आदमी की सुरक्षा कराने के बजाय किसानों की निगरानी करवा रहे हैं। किसानों की इस टिप्पणी पर कई अफसर मुस्कुराने लगे।
डॉक्टर निकला फार्मसिस्ट
धरनास्थल पर किसानों की सेहत की जांच के लिए एमबीबीएस डाक्टर की डयूटी लगाने का दावा किया गया था। बुधवार को डॉक्टर का झूठ भी पकड़ा गया। गुस्साएं किसानों ने डाक्टर को भगवान का वास्ता दिया तो उनसे सच उगल दिया।
दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने फार्मसिस्ट को डाक्टर बनाकर धरनास्थल पर भेजा था। अफसरों का फरेब सामने आते ही किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया और वहां से फार्र्मसिस्ट को दौड़ा दिया। गौरतलब है कि सिपाही अजमत की मौत भी फार्र्मसिस्ट के इंजेक्शन लगाने के बाद ही होने का आरोप है।
प्रशासनिक अफसरों का रवैया किसानों के प्रति सही नही हैं। हम शासन तक जाएंगे। धरना बदस्तूर जारी है और मांग मानी जाने तक धरना बरकरार रहेगा।- मांगेराम त्यागी, प्रदेश सचिव, भाकियू