बीजेपी ने पांच दिन के इंतजार के बाद हाईप्रोफाइल डिबाई सीट पर अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी। प्रत्याशियों की लंबी सूची को दरकिनार कर एकाएक अनीता राजपूत को पार्टी ने डिबाई से प्रत्याशी बनाया है। इनको कल्याण परिवार के विश्वासपात्र होने का लाभ मिला है। डिबाई सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है, लेकिन अब मुकाबला रोचक होगा।
भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार रविवार को डिबाई विधानसभा सीट से डॉ. अनीता राजपूत का नाम घोषित कर दिया है। पार्टी को डिबाई सीट पर प्रत्याशी तलाशने में पांच दिन लग गए। भाजपा छह सीटों बुलंदशहर, स्याना, खुर्जा, सिकंदराबाद, शिकारपुर और अनूपशहर पर पहले ही टिकट फाइनल कर चुकी है। डिबाई सीट पर तीन कद्दावर नेताआ का दावेदारी थी।
डिबाई सीट पर भाजपा अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही थी। रविवार को पार्टी ने नई लिस्ट जारी कर डॉ. अनीता राजपूत के नाम पर मुहर लगा दी। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पारंपरिक सीट रही है। 1996 के चुनाव में वह इसी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने यह सीट अपने बेटे राजवीर सिंह के लिए छोड़ दी।
2002 में राजवीर सिंह ने इसी सीट से चुनाव जीता। इसके बाद 2007 और 2012 में डिबाई विधानसभा पर राजवीर सिंह दो बार गुड्डू पंडित से चुनाव हारे। वर्तमान में राजवीर सिंह एटा से सांसद हैं।
लोगों का कहना है कि अनीता राजपूत यहां के प्रत्याशियों की चर्चाओं में नहीं थी। यहां से कल्याण परिवार के किसी सदस्य को टिकट मिलने की चर्चा जोरों पर थी। ऐसे में पार्टी ने कल्याण परिवार के विश्वसनीय व्यक्ति को प्रत्याशी बनाने के साथ ही पार्टी में स्थानीय विरोध को शांत रखने का भी प्रयास किया है।