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Bulandshahar News: इमरजेंसी में दो घंटे गुल रही बिजली, मरीजों को नहीं मिला उपचार

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बुलंदशहर। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार रात बिजली गुल रहने से घायल और गंभीर बीमार लोगों को दो घंटे तक उपचार नहीं मिला। घायल लोग उपचार के इंतजार में तड़पते रहे। कुछ मरीज उपचार कराने के लिए निजी अस्पतालों में गए। फाल्ट होने के कारण इन्वर्टर भी डाउन हो गया, जिस कारण ज्यादा समस्या हुई।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में शाम छह बजे अचानक बिजली गुल हो गई। बिजली गुल होने के बाद कर्मचारी उसे ठीक करने में लगे रहे, लेकिन वह आठ बजे तक शुरू नहीं हो सकी। इस दो घंटे के दौरान इमरजेंसी में उपचार कराने पहुंचे सड़क दुर्घटना के राहुल चौधरी के मुंह से खून वह रहा था, लेकिन अंधेरे के कारण चिकित्सक उपचार नहीं दे पा रहे थे। राहुल का शिवाली के पास बाइक से भिड़ंत हो गई थी, जिसमें उनके गंभीर चोट आई हैं। टिंकू सिंह का सिकंदराबाद से जेवर रोड पर बाइक से जा रहे थे। जौली गांव के पास ट्रैक्टर ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए और पैर में भी काफी चोट आई है। उन्हें भी उपचार नहीं मिल सका। अगौता नीमचाना के रहने वाले बाबू ने शराब में शीरा मिलाकर पी लिया था, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी, परिजन उसे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, जहां इलाज के लिए उन्हें काफी इंतजार करना पड़ा। इसके अलावा सरायधारी निवासी किशोर सुनील पहुंचा, वह अंधेरे में उपचार न मिलने के कारण निजी चिकित्सक यहां उपचार कराने चला गया। फार्मासिस्ट आरसी वर्मा ने बताया कि शाम में फाल्ट होने के बाद से बिजली गुल थी। करीब छह बजे इंवर्टर भी बंद हो गया। बिजली कर्मचारी उसे ठीक करने में लगे हुए हैं। जनरेटर की लाइट भी इमरजेंसी में नहीं पहुंची।
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सीएमएस डॉ.राजीव प्रसाद ने बताया कि फॉल्ट ठीक करने के लिए बिजली कर्मचारियों को भेजा गया है। ईएमओ को कक्ष में रहने के निर्देश दिए है, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था करके मरीजों का उपचार किया जा सके।
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अंधेरा होते ही लापता हुए ईएमओ
छह बजे इमरजेंसी में अंधेरा होने के बाद से ही ईएमओ अपनी सीट से चले गए। इस कारण से भी मरीजों को उपचार नहीं मिला। सुनील के परिजनों ने आरोप लगाया कि अंधेरा होने पर भी मोबाइल की टार्च जलाकर उपचार किया जा सकता था। लेकिन वहां से चिकित्सक ही उपस्थित नहीं थे, बेटे को एक घंटे तक ई-रिक्शे में ही बैठाए रखा।
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