लापता महिला को तीन साल में सात विवेचक भी नहीं खोज पाए हैं। इसके साथ ही एक अन्य महिला सड़े-गले शव की भी पुलिस शिनाख्त नहीं कर पाई है। तीन माह तक महिला के पति को जेल में रखने के बाद पुलिस ने केस में एफआर लगा दी।
एसएसपी ने लापता महिला का पता लगाने और अज्ञात महिला के शव की शिनाख्त को अब केस दोबारा खोलने के आदेश दिए हैं। उनकी पहल से परिजनों को इंसाफ की आस जगी है।
पहासू के बरौला का नंगला निवासी भूरी (30) पुत्री बालकिशन की ससुराल गौतमबुद्धनगर के जहांगीरपुर की नगलिया में बिजेंद्र पुत्र बांकेलाल के यहां थी। चार अप्रैल 2015 में भाई धनेश ने भूरी के पति बिजेंद्र, जेठ सुरेंद व सीटू, जेठानी फुलवेश, सास शांतिदेवी व ननद रामवती के खिलाफ दहेज की मांगपूरी न होने पर भूरी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने भूरी की तलाश शुरू कर दी। 26 मार्च 2015 में अनूपशहर थाना क्षेत्र में एक महिला की सड़ी गली लाश मिली। उसका चेहरा तेजाब से जला हुआ था। भाई धनेश ने शव की पहचान भूरी के रूप में की। पुलिस ने अपहरण के बाद हत्या कर सबूत मिटाने की धाराओं में मामला तरमीम कर विवेचना शुरू कर दी।
तत्कालीन विवेचक चंद्रकांत पांडेय ने 17 जून 2015 में भूरी के पति बिजेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तीन माह में चार्जशीट पेश न करने पर बिजेंद्र को कोर्ट ने रिहा कर दिया। डीएनए रिपोर्ट से पता चला कि लाश भूरी की नहीं थी।
इसके बाद कई विवेचक आए और गए, लेकिन वे न तो भूरी का पता लगा सके और न ही उस महिला की गुमनाम लाश का। पुलिस ने 16 दिसंबर 2016 को इस मामले में एफआर लगा दी।
मार्च 2017 में एसएसपी ने विवेचक को दोबारा जांच करने के आदेश दिए। जिसमें कहा कि पुलिस के रिकॉर्ड में भूरी जिंदा है। उसका पता लगाया जाए। साथ ही अज्ञात मिले महिला के शव की भी शिनाख्त की जाए।
पुलिस के सामने यह सवाल बार-बार आ रहा है कि आखिर भूरी कहां गई? पुलिस ने भूरी के ससुरालियों और अन्य लोगों से भी पूछताछ की, लेकिन कहीं पता नहीं चला। हाईकोर्ट ने पुलिस को दो माह के भीतर केस के निस्तारण के आदेश दिए। बावजूद इसके पुलिस कुछ नहीं कर पाई।