ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट के लिए खुलेगा ट्रेनिंग सेंटर
बुलंदशहर। अब लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदक को ऑटोमेटेड ट्रैक पर टेस्ट देना होगा। टेस्ट में पास होने के बाद संबंधित को डीटीसी से प्रमाणपत्र मिलेगा जिसके बाद ड्राइविंग लाइसेंस बनेगा। इसके लिए जिले में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (डीटीसी) खोला जाएगा। जहां आवेदक को चार सप्ताह का प्रशिक्षण लेना होगा।
पिछले वर्ष लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए घर बैठे टेस्ट देने की सुविधा दी गई थी। इस बार फिर लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसके लिए आवेदक को लाइसेंस जारी करवाने से पूर्व डीटीसी पर चार सप्ताह का प्रशिक्षण लेना होगा। जानकारी के अनुसार एआरटीओ कार्यालय पर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अभी भी 30 से 40 लोग प्रतिदिन आते हैं। जबकि वर्तमान में लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाते हैं। इसमें आवेदक को ऑनलाइन टेस्ट पास करना होता है। इसके बाद संबंधित का स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनाया जाता है। लेकिन अब परिवहन आयुक्त द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस के लिए एक शिक्षण पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। इसे दो हिस्सों में (थ्योरी और प्रैक्टिकल) बांटा गया है। इसके लिए जिले में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा, जहां आवेदक को सड़क हादसों से बचाव के तरीके और ड्राइविंग से जुड़ी सभी बारीकियां सिखाने के बाद ऑटोमेडेट टेस्ट देना होगा। टेस्ट में पास होने पर लाइसेंस जारी किया जाएगा।
चार सप्ताह का लेना होगा प्रशिक्षण
एआरटीओ के अनुसार हल्के मोटर वाहन के लिए पाठ्यक्रम की अवधि चार सप्ताह की होगी, जो 29 घंटे तक चलेगी। इसमें प्रैक्टिकल के लिए बुनियादी सड़कों, राजमार्गों, शहर की सड़कों, ग्रामीण सड़कों, रिवर्सिंग और पार्किंग, चढ़ाई और डाउनहिल ड्राइविंग आदि पर गाड़ी चलाने के लिए 21 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शेष आठ घंटे थ्योरी के लिए होंगे। साथ ही ट्रेनिंग सेंटरों में चालक के लिए प्रशिक्षण क्लास रूम की व्यवस्था, ट्रेनर के साथ प्रशिक्षण और ऑटोमेटेड ट्रैक पर प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। सेंटर में 10 प्रकार के कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कोर्स के अनुसार शुल्क तय किया जाएगा।
हल्के और भारी वाहनों के लिए अलग-अलग होंगे सेंटर
एआरटीओ के अनुसार दोपहिया, तीन पहिया या हल्के मोटर वाहनों के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोलने को कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। जबकि मध्यम और भारी यात्री, मालवाहकों या फिर ट्रेलरों की ट्रेनिंग सेंटर के पास दो एकड़ जमीन होनी चाहिए। जिले में इसके लिए जल्द ही जमीन चिन्हित की जाएगी। संभावना है सेंटर को पीपीपी मॉडल पर तैयार कराया जाएगा।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में पिछले साल से लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। अब लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदक को डीटीसी प्रमाणपत्र लेना होगा। इसके बाद ही संबंधित का लाइसेंस जारी होगा। इसके लिए डीटीसी सेंटर खोला जाएगा, जहां सीसीटीवी की निगरानी में प्रशिक्षक द्वारा चालक को प्रशिक्षण दिया जाएगा - सतीश कुमार, एआरटीओ प्रशासन