करोड़ों रुपये खर्च कर 45 गांवों में लगाई गई पानी की टंकियां अफसरों की अनदेखी से शो पीस बन गई हैं। पेयजल परियोजनाए उन गांवों में लगाई गईं थी, जिन गांवों में पेयजल पूरी तरह दूषित हो चुका है। पाइपलाइन परियोजना पर करोड़ों रुपये खपाने के बाद भी 45 ग्राम पंचायतों में ग्रामीण दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
जिले में पांच हजार की आबादी से अधिक ग्राम पंचायतों में पेयजल स्कीम(पानी की टंकी और पाइपलाइन) लागू की गई थी। साथ ही पानी की टंकियां और पाइपलाइन उन गांवों में भी लगाई गई, जहां पानी दूषित हो चुका था। पानी की टंकियां आठ साल पूर्व लगाई गई थी।
सिस्टम की अनदेखी के कारण 45 गांवों में पेयजल परियोजनाए बंद पड़ी हुई हैं। 12 गांव तो ऐसे हैं जहां पाइपलाइन मरम्मत के लायक भी नहीं रह गई हैं। बाकी गांवों में तकनीकी दिक्कत के कारण पाइपलाइन से सप्लाई रूकी हुई हैं। ऐसे में इन गांवों में ग्रामीण दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
अब नहीं लगेंगी पानी की टंकियां जिन गांव और कस्बों में पानी आर्सेनिक युक्त पाया जाएगा उन्ही क्षेत्रों में अब पानी की टंकिया लगाई जाएगी। जिले में कही भी पानी में आर्सेनिक की शिकायत नहीं मिली है।
यहां बंद हैं पेयजल परियोजनाएं
तिलबेगमपुर, हृदयपुर, अंधेल, साहनवली, मुरादाबाद, शेरपुर, गेसुपुर, शिवाली, कुतुबपुर, राशिदपुर, किशनपुर, मांगलौर, बरखैरा, समसपुर, फतेहगढ़, अमरपुर, फैजलपुर, मुबारकपुर, खुर्जा देहात, सैदपुर, खालौर, सांखनी, भैंसखुर, दानपुर, भंवरा, पिवयानी, खंडर, औरंगाबाद चांदौक, किरयावली, रानीवाला, ओलीना, बालका, रिशालु, बुकलाना, गांगरौल, ढकौली, रहमापुर स्यावली, जटपुरा, रसूलगढ़, ढीगी, बिलसूरी, परवाना, मूढ़ीबकापुर, भैईपुर, बदरपुर
दूषित पानी से सेहत को नुकसान
सीएमओ डा. दीपक ओहरी ने बताया कि लगातार दूषित पानी का सेवन करने से किडनी, लीवर और पेट की बीमारियां पनपने लगती हैं। त्वचा रोग भी हो जाते हैं। दूषित पानी के लगातार सेवन ने शरीर के महत्वपूर्ण ऑर्गेस फेल होने का खतरा भी बना रहता है।
परियोजनाएं जल्द होंगी शुरू सीडीओ
45 गांवों में पाइपलाइन से पेयजल आपर्ति ठप है। जलनिगम से रिपोर्ट मंगा ली है। मरम्मत योग्य परियोजनाओं को जल्द ही शुरू कराया जाएगा।
-जसजीत कौर,सीडीओ बुलंदशहर