डीएम आंटी...हमारी जान बचाइए। हम नार्मल मैदान स्थित बेसिक स्कूल में पढ़ते हैं। हमारे स्कूल की छत बिल्कुल टूट चुकी है। हम इसी छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं।
यह छत कभी भी हमारे ऊपर गिर सकती है। जब सिकंदराबाद के एक निजी स्कूल की छत गिरी थी और एक बच्ची की मौत हो गई थी तो आपने वादा किया था कि आप हमारी सुरक्षा करेंगी। डीएम आंटी...प्लीज हमारी सुरक्षा कीजिए।
नार्मल मैदान स्थित स्कूल में पढ़ने वाले नौनिहाल अधिकारियों से कुछ इसी तरह की अपील करते हैं। प्रशासन ने दिल्ली के स्कूल के टैंक में गिरकर हुई देवांश की मौत से भी सबक नहीं लिया।
यहां प्राथमिक और जूनियर दोनों स्कूल एक ही भवन में चलते हैं। स्कूल में करीब 60 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल के बरामदे की आधी छत उखड़ चुकी है। इसके नीचे खड़े होने पर आरपार दिखाई दे रहा है।
छत पर लगे लोहे पर अटके हुए पत्थर कभी भी गिर सकते हैं। आए दिन जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों में हादसे की घटनाएं हो रही हैं। घटना होने के बाद ही शासन प्रशासन जागता है।
स्कूल के प्रधानाध्यापक गणेश दत्त शर्मा ने बताया कि सर्दी का मौसम होने से धूप के कारण बच्चों को यहां बैठाकर पढ़ा रहे हैं। वरना उन्हें कमरे में ही बैठाया जाता है। उन्हाने अधिकरियों को अवगत करा दिया है।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसी बात है तो एबीएसए से इस संबंध में रिपोर्ट मंगाई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -- विनोद कुमार सिंह, प्रभारी बीएसएसए