सियासी बिसात पर लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपनी पराजय स्वीकार कर ली। पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के चलते शक्ति प्रदर्शन से पहले 22 मई को ही जिपं अध्यक्ष हरेंद्र यादव ने अपर मुख्य अधिकारी को त्यागपत्र सौंप दिया। अध्यक्ष के त्याग पत्र पर बिना देरी किए शासन ने भी मुहर लगा दी। नया अध्यक्ष कौन होगा, यह निर्णय आला कमान से मशवरा के बाद भाजपा जिला संगठन तय करेगा।
भाजपा जिलाध्यक्ष हिमांशु मित्तल की अगुवाई में 06 अप्रैल को 33 जिला पंचायत सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लेकर तत्कालीन डीएम से मिले थे। डीएम ने बहुमत सिद्ध कराने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी। 23 मई को जिला पंचायत अध्यक्ष को सदन में संख्या बल के आधार पर बहुमत सिद्ध करना था।
भाजपा जिला अध्यक्ष हिमांशु मित्तल के नेतृत्व में 40 जिला पंचायत सदस्य सभागार में पहुंचे। वहीं पर सदस्यों को जिला पंचायत अध्यक्ष के इस्तीफे की जानकारी दी गई। हालांकि न्यायिक अफसरों के सामने 40 जिला पंचायत सदस्यों ने ध्वनि मत और हाथ उठाकर अविश्वास प्रस्ताव पर आस्था जताई।
इस्तीफा मंजूरी के क्रम में भी सदस्यों को अवगत कराया गया। जैसे ही जिला पंचायत सदस्यों को पता चला कि इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है, भाजपा खेमे और सदस्यों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
जिला पंचायत अध्यक्ष हरेंद्र यादव सदन में शक्ति प्रदर्शन से पहले तक अपने पास बहुमत होने का दावा कर रहे थे। खासबात यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष हरेंद्र यादव का फेवर करने वाले 12 सदस्य सदन से गायब रहे। अध्यक्ष के साथ अनुपस्थित सदस्यों में उनकी पत्नी आशा यादव भी रहीं।