संवाद न्यूज एजेंसी
सिकंदराबाद। अकीदमंदों ने शुक्रवार को नगर की मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज अदा की। नमाज के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। नगर और क्षेत्र में नमाज शांतिपूर्ण संपन्न हुई।
नगर की जामा मस्जिद में मौलाना मोहम्मद आरिफ, कैतवाली मस्जिद में मौलाना मोहम्मद अरशद ने जुमे की नमाज अदा कराई। इसके अलावा नगर और क्षेत्र की सभी मस्जिदों में अकीदमंदों ने जुमे की नमाज अदा की। नमाज से पूर्व मौलाना मोहम्मद आरिफ, मुफ्ती नसीम, मौलाना अरशद आदि ने कहा कि ईद आपसी भाईचारे, सांप्रदायिक सौहार्द का पर्व है। हमें ईद के पर्व की खुशियों को एक साथ मिलकर बांटना चाहिए। हमारे किसी भी कार्य से किसी दूसरे को परेशानी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि किसी का दिल दुखाना अल्लाह को नाराज करना है और अल्लाह की नाराजगी हासिल कर कोई भी दोनों जहान में कामयाब नहीं हो सकता। कामयाबी का रास्ता अल्लाह की रजा हासिल करने से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह का एक नाम रब्बूल आलामीन भी है, जिसका अर्थ होता है कि पूरी दुनिया का खुदा। अल्लाह ने अपने आपको को किसी एक का खुदा नहीं कहा। इसलिए हमें भी आपस में भेदभाव नहीं करना चाहिए। सभी लोगों से मोहब्बत करनी चाहिए क्योंकि सब अल्लाह की मखलूक हैं। बुराई का जवाब हमेशा भलाई से दो। दुनिया से बुराई को समाप्त करने का यही एक रास्ता है। उन्होंने पैगंबर साहब के बारे में बताते हुए कहा कि एक बुढ़िया उनके ऊपर हमेशा कूड़ा डालती थी। मगर, उसके बीमार होने पर वह उसका हाल पूछने के लिए गए। उन्होंने बुराई का जवाब भलाई से दिया। जिसके बाद बुढ़िया हमेशा सही रास्ते पर आ गई। हर धर्म मोहब्बत, दया और परोपकार का संदेश देता है। हमें देश के सदियों पुराने आपसी भाईचारे, सांप्रदायिक सौहार्द को कायम रखना है। देश की परंपरा की रक्षा करना हर एक नागरिक की जिम्मेदारी है। उलेमाओं ने लोगों से ईद की नमाज को ईदगाह, मस्जिदों में अदा करने, सड़क पर नमाज अदा नहीं करने की अपील की। नमाज के बाद देश में अमन शांति, खुशहाली, एकता, आपसी भाईचारे, भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाने, नफरत करने वालों के दिलों में मोहब्बत का दीपक जलाने की दुआ भी मांगी।