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आशियाने की चाहत में उजड़ गया देवेंद्र का परिवार

Sat, 28 Jan 2017 11:27 PM IST
अमर उजाला/बुलंदशहर
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इसी खाट पर सो रहे थे तीनों। - फोटो : ब्यूरो
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आर्थिक तंगी के बोझ तले दबे मजदूर की पैतृक गांव में सरकारी योजना से मकान बनाने की चाहत में हंसता-खेलता परिवार एक ही रात में उजड़ गया। झोपड़ी में लगी आग से उसमें सो रहे तीन बच्चों की जलकर मौत हो गई। एक साथ तीन-भाई बहनों की मौत पर परिवार ही नहीं क्षेत्र में कोहराम मचा हुआ है। बड़ी संख्या में आस-पास के गांव के लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे है।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव तिलडेरी निवासी देवेंद्र पुत्र बहुरी ने बताया कि वह ओमपाल, महेंद्र, पिंकी सहित चार भाई हैं। गांव में उनका दो कमरों का छोटा सा मकान है। उसकी शादी 9 मार्च वर्ष 2003 में अलीगढ़ के गांव भोजका निवासी गजना के साथ हुई थी। आर्थिक तंगी के चलते वह 2004 में पत्नी के साथ ग्रेटर नोएडा में मजदूरी करने के लिए चला गया और ऐछर गांव में पत्नी के साथ रहने लगा।

बताया कि नोएडा में किराए पर परिवार के साथ रहकर मजदूरी करने के दौरान उसकी अपने पैतृक गांव में आशियाना बनाने की इच्छा खत्म नहीं हुई। आर्थिक तंगी के चलते वह सरकारी योजना से गांव में मकान बनाना चाहता था। जानकारी करने पर उसे पता चला कि सरकारी योजना से गांव में मकान की मंजूरी के लिए गांव में रहना पड़ेगा।
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मार्च 20016 में वह पत्नी गजना, बेटे सुशांत (12) बेटी आंशी (6) बेटे नैतिक (2) के साथ गांव में अपने पैतृक मकान के अहाते में झोपड़ी डालकर रहने लगा। काफी प्रयासों और ग्राम प्रधान की मदद से लोहिया आवास योजना के तहत उसका मकान मंजूर हो गया। गांव में उनकी 120 गज पैतृक जमीन पड़ी हुई थी। दूसरे भाइयों ने उसकी आर्थिक तंगी को देखते हुए वह जमीन उसे दे दी थी।

बताया कि शुक्रवार की रात्रि करीब 8.45 बजे वह तीनों बच्चों को झोपड़ी में सुलाकर पत्नी के साथ निर्माणाधीन मकान में काम करने के लिए चला गया। 9 बजे उसके भाई पिंकी ने उसे सूचना दी झोपड़ी में आग लग गई। वह पत्नी के साथ बदहवास हालत में मौके पर पहुंचा। और ग्रामीणों की मदद से तीनों बच्चों को बाहर निकाला।

गंभीर रूप से झुलसे बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने नैतिक, आंशी को मृत घोषित कर दिया। सुशांत की हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली रेफर कर दिया। देवेंद्र बताया कि शनिवार की सुबह करीब पांच बजे सुशांत की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। आंशी व सुशांत गांव के ही प्राथमिक विद्यालय के छात्र थे।

6 किमी की दूरी तय करने में दमकल को लगे दो घंटे
फायर स्टेशन की दूरी घटना स्थल से मात्र 6 कि.मी की दूरी पर होने के बावजूद भी दमकल विभाग को यह सफर तय करने में दो घंटे लग गए। दमकल गाड़ी के देरी से पहुंचने पर ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीण गौरव, सुनील, अनिल, तेजपाल, सुरेश, आदि ने बताया कि झोपड़ी में आग रात्रि करीब 8.45 पर लगी। दमकल की गाड़ी गांव में रात्रि 11 बजे पहुंची।

बताया कि जब तक दमकल की गाड़ी पहुंची सब कुछ जलकर राख हो चुका था। दो मासूम जिंदगियां मौत के मुंह में समा चुकी थी और तीसरी मौत की जंग लड़ रही थी। ग्रामीणों में दमकल के देरी से पहुंचने पर रोष दिखा। फायर स्टेशन इंचार्च अजीज खान ने बताया कि उन्हें रात्रि में 10.15 पर सूचना मिली और सूचना के आधा घंटे में मौके पर पहुंच गए थे।

 बच्चों को बचाने के प्रयास में झुलसे तीन ग्रामीण
ग्रामीण मोंटू, अशोक और लाला ने बताया कि शुक्रवार की रात्रि करीब नौ बजे महिलाओं की चीखने की आवाज सुनी तो वह दौड़ते हुए पहुंचे। देखा तो देवेंद्र की झोपड़ी से आग की लपटें उठ रही थी। परिवार के लोगों ने बताया कि तीनों बच्चें झोपड़ी के अंदर है। उन्होंने बच्चों को बचाने के प्रयास में झोपड़ी का जला हुआ मलबा हाथों से हटाकर बच्चों को जली हुई अवस्था में बाहर निकाला।
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