बुलंदशहर। खेतों में खड़ी फसल को बेसहारा पशु नुकसान पहुंचा रहे हैं लेकिन अधिकारी किसानों की समस्या के समाधान के लिए गंभीर नहीं हैं। स्थिति यह है कि आए दिन किसान बेसहारा पशुओं से खेतों को बचाने के लिए खेतों की रखवाली करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन अधिकारी इन बेसहारा पशुओं को गोशाला भिजवाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। इसके साथ ही पशुओं को खुले में छोड़ने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
जिले में बेसहारा पशुओं को संरक्षित करने के लिए करीब 154 गोशालाओं का संचालन होता है। इनमें करीब 18 हजार गोवंशों को संरक्षित किया हुआ है। इन गोशालाओं के संचालन के लिए एक निर्धारित शुल्क प्रति गोवंश के अनुसार सरकार की ओर से दिया जाता है। जबकि चारा, भूसा समेत अन्य प्रकार की सामग्री के लिए दानदाताओं पर भी निर्भर रहना पड़ता है। गोशालाओं के संचालन का उद्देश्य था कि खुले में बेसहारा पशु न घूमें और किसानों की फसल को नुकसान न पहुंचाएं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण बीबीनगर, शिकारपुर, पहासू, स्याना, बुगरासी, ऊंचागांव, नरौरा, अरनिया, चोला, ककोड़ समेत अन्य क्षेत्रों में हजारों की संख्या में गोवंश खुले में घूम रहे हैं और किसानों की फसल को भी बर्बाद कर रहे हैं। कई बार अधिकारियों ने इन बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया लेकिन हर बार खानापूर्ति कर ली गई। जिसके चलते कई बार विभिन्न भाकियू संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन भी किया, लेकिन इसके बाद भी अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। इसके साथ ही पशुओं को खुला छोड़ने वाले लोगों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई नहीं की गई है।
अधिकारी नहीं कर रहे कार्रवाई
खानपुर। क्षेत्र की ग्राम पंचायत जरिया आलमपुर में निराश्रित पशुओं के आतंक से किसान परेशान हैं। गांव व सड़कों पर जगह-जगह निराश्रित पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। गांव निवासी चंदरपाल सिंह, महेन्द्र कुमार, सचिन कुमार ने शिकायत देकर बताया गांव में निराश्रित पशु खेत में खड़ी हरी फसलों को नष्ट कर रहे है। किसानों के सबसे ज्यादा नुकसान गेंहू की फसल का हो रहा है। ब्लॉक प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों शिकायत के बाद भी मौन है।
बड़े झुंडों में घूमते हैं बेसहारा पशु
बेसहारा पशुओं का झुंड एक साथ खेतों में पहुंचता है। जिसके चलते न केवल पशु फसल को बर्बाद करते हैं बल्कि जब किसान इन पशुओं को भगाने के लिए पहुंचते हैं तो कई बार वह किसानों पर हमला भी कर देते हैं।
समस्या के समाधान के लिए पूर्व में भी अभियान चलाया गया था। जल्द ही आगे भी रणनीति बनाकर अभियान चलाया जाएगा। - डाॅ. प्रशांत कुमार, एडीएम प्रशासन