किसानों की कर्ज माफी का अब तक प्रशासन के पास कोई आदेश नहीं पहुंचा है। गाइडलाइन नहीं मिलने से शासन के पास सीमांत और लघु़ किसानों की सूची तक नहीं पहुंच पाई है।
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली कैबिनेट बैठक में कर्जमाफी पर निर्णय लेने की घोषणा की थी।
पहली कैबिनेट बैठक में निर्णय तो लिया गया, लेकिन इसके बाद आदेश फाइलों में सिमट गया। आलम यह है कि अब तक बैंक और प्रशासन के पास सरकार का कर्ज माफी से संबंधित आदेश नहीं पहुंचा है और न ही गाइडलाइन ही उपलब्ध कराई गई हैं।
ऐसे में बैंकर्स के सामने समस्या यह आ रही है कि वह कितने कर्ज वाले सीमांत और लघु किसानों को सूचीबद्ध करें। हालांकि बैंक के उच्च अधिकारियों ने स्थानीय अफसरों को सभी सीमांत और लघु किसानाें की सूची तैयार करने के लिए कहा है।
गाइडलाइन और शासनादेश के इंतजार के चलते शासन को सीमांत और लघु किसानों की सूची तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। वहीं कर्ज माफ नहीं होने से किसान भी पेशोपश में हैं।