ग्राम पंचायत चुनाव में हर बार की तरह इस बार भी अपराध की मिलीजुली हनक दिखाई दी। कहीं डंका बजा तो कहीं हवा निकल गई। कई गांवों में शातिर अपनों को गांव के लोगों के वोट नहीं दिला सके।
अगौता थाना क्षेत्र का गांव अनहेड़ा के हिस्ट्रीशीटर प्रमोद ने अपनी मां माया देवी को चुनाव लड़ाया था। माया देवी करीब 307 वोटों से विजयी हुईं।
अगौता थाना क्षेत्र के गांव मानपुर के हिस्ट्रीशीटर कुलदीप ने अपने चाचा उपेंद्र मलिक चुनाव लड़ाया था। लेकिन वह हार गया।
शिकारपुर थाना क्षेत्र के गांव मेहमूदपुर निवासी प्रभीत शातिर बदमाश है। प्रभीत ने अपने प्रतिद्वंदियों को करारी शिकस्त दी। शिकारपुर थाना क्षेत्र के गांव मुस्तफाबाद ददुआ निवासी योगेंद्र सिंह उर्फ लाला पर पुलिस ने तीन हजार का इनाम घोषित कर रखा है।
उसने फरारी काटते हुए अपनी मां शकुंतला देवी को चुनाव लड़वाया और उसे भारी मतों से चुनाव जितवाया।
औरंगाबाद थाना क्षेत्र के गांव इस्माइला के हिस्ट्रीशीटर अमित ठाकुर ने अपनी मां अनिल देवी को चुनाव लड़ाया था लेकिन वह करीब 250 वोटों से हार गईं।
बीबीनगर थाना क्षेत्र के गांव तिवड़ा से कुसुम पत्नी हरेंद्र ने जीत दर्ज की है। कुसुम का पति हरेंद्र हिस्ट्रीशीटर है और बीबीनगर सहित अनेक थानों में हरेंद्र के खिलाफ विभिन्न मामले दर्ज हैं।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र का गांव खालौर उस समय सुर्खियों में आ गया जब शातिर बदमाश दीपक को पकड़ने गई पुलिस को भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों ने एक दरोगा को बंधक बना लिया। पुलिस की तमाम सख्ती के बाबजूद जेल में बंद शातिर दीपक खालौर की मां राजवती ने जीत दर्ज करा ली।
राजवती ने अपने प्रतिद्वंद्वी रवि खालौर को 121 वोटों से पराजित किया है। अब देखना होगा कि ये लोग प्रधान बनने के बाद गांव का कितना विकास कराते हैं।