नवजात की मौत के बाद प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने निजी अस्पताल में जमकर हंगामा किया। पीड़ित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर प्रसूता को बंधक बनाने का भी आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर मौके पर पहुंची कोतवाली देहात पुलिस ने परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया।
बाद में सीएमओ ने अस्पताल पहुंचकर इलाज से संबंधित सभी रिकॉर्ड जब्त कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन पर मीडियाकर्मियों के साथ भी अभद्रता का आरोप है। थाना अगौता क्षेत्र के गांव बांगवाला निवासी कलुआ पुत्र दौलतराम ने कोतवाली देहात में दी तहरीर में बताया कि छह अक्तूबर को वह गर्भवती पत्नी की डिलीवरी के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर आया था।
अस्पताल में एक आशा उन्हें बहला-फुसलाकर यमुनापुरम स्थित एक निजी अस्पताल ले गई। यहां डिलीवरी की पूरी जिम्मेदारी ली गई। चिकित्सका ने उसकी पत्नी की हालत गंभीर बता उसका ऑपरेशन कर दिया। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर की लापरवाही से नवजात बेटी की मौत हो गई। उसकी पत्नी का भी ठीक से उपचार नहीं किया गया।
उसको बंधक बना लिया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने पैसा देने पर प्रसूता को छोड़ने की बात कही। अस्पताल प्रबंधन पर जातिसूचक शब्द बोलने और अभद्रता का आरोप लगाया है। पीड़ित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया।
हंगामे की सूचना मिलते ही देहात पुलिस मौके पर पहुंच गई। कोतवाली पुलिस ने परिजनों को समझाकर शंात कराया। पुलिस तहरीर के आधार पर कार्रवाई की बात कह रही है।
सीएमओ ने जब्त किया रिकॉर्ड, जांच शुरू
निजी अस्पताल में बच्ची की मौत के बाद पहुंचे सीएमओ ने जांच शुरू कर दी है। सीएमओ के नेतृत्व में जांच टीम ने अस्पताल से इलाज से संबंधित सभी रिकॉर्ड जब्त कर लिए।
गए थे महिला अस्पताल, पहुंच गए निजी अस्पताल
सोमवार को हुई घटना ने जिला महिला अस्पताल में फिर से गोरखधंधे की पोल खोल दी है। परिजन गर्भवती पत्नी को लेकर महिला अस्पताल गए थे, लेकिन आशा की कारस्तानी से वह निजी अस्पताल पहुंच गए।
दरअसल, महिला अस्पताल में आशाएं निजी अस्पतालों के एजेंट के रूप में काम करती हैं। निजी अस्पतालों से इन्हें प्रति गर्भवती के बदले दो से पांच हजार रुपये तक कमीशन दिया जाता है। पिछले वर्ष भी इस तरह गोरखधंधा उजागर हुआ था।