नगर में एक डॉक्टर ने पुराने नोट के चलते बुखार से पीड़ित किसान का ट्रीटमेंट करने से इंकार कर दिया। दरअसल, मृतक के परिजन कई दिन से बैंक की कतार में लगे हुए थे, मगर उनका नंबर आने से पहले ही कैश खत्म हो जाता था। बुधवार को गांव वालों ने किसी तरह चंदा कर छोटे नोट जमा कर लिए।
इससे पहले कि छोटे नोट डॉक्टर तक पहुंच पाते किसान ने रात में ही दम तोड़ दिया। नई करेंसी नहीं मिलने के चलते किसान की मौत होने से गांव में मातम का माहौल है। सदर तहसील के ढकौली गांव निवासी साकिर अली का सात नवंबर से बुखार का उपचार चल रहा था। साकिर के भाई चांद खान ने बताया कि नौ नवंबर को अचानक 500-1000 के नोट बंद हो गए।
15 नवंबर तक साकिर का उपचार पुराने नोटों से चलता रहा। इसी बीच परिजनों के पास छोटे पुराने नोट खत्म हो गए। आरोप है कि नगर के एक डॉक्टर ने 500-1000 का नोट लेने से इंकार कर दिया। काफी इल्तजा करने के बाद भी डाक्टर नहीं पसीजा। परिजन शाकिर को लेकर घर पहुंचे और गांव वालों के सामने समस्या रखी।
गांव वालों ने 10, 20, 50 और 100 रुपये चंदा देकर उपचार के लिए पैसा जमा कर लिया। इससे पहले कि छोटे नोट और मरीज डॉक्टर के पास पहुंचते रात में साकिर ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। रात में ही पूरा गांव पीड़ित परिवार के पास पहुंच गया।
गांव में लोग नोटबंदी को लेकर काफी गुस्से में हैं। साकिर अपने पीछे दो बेटी, दो बेटे और पत्नी छोड़ गए हैं। परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं बताई गई है।