एनएच-91 पर मां-बेटी से हुए गैंगरेप मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीम तो अभी तक शहर में नहीं पहुंची लेकिन पुलिस अपने होमवर्क में जुट गई है। निशाने पर वारदात के बाद पुलिस कार्रवाई भी होगी जिसमें पड़ताल के लिए सीबीआई उन अफसरों पर शिकंजा कस सकती है जिन्हें इस मामले में लापरवाही या दोषपूर्ण कार्यशैली पर निलंबित किया गया है।
मालूम रहे कि 29 जुलाई की रात दोस्तपुर गांव के पास हुई सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस कार्रवाई में कई झोल उजागर हुए हैं। साथ ही मामला दबाने की कोशिश और आनन-फानन मेडिकल कराकर पीड़ितों को उनके गंतव्य तक भेजने के रवैये से पुलिस पर शुरू से ही उंगली उठने लगी थी।
मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने पर एसएसपी समेत सात पुलिसकर्मियों के सस्पेंड कर दिया गया। हाईकोर्ट ने मामले को स्वत: संज्ञान लिया तो निलंबित होने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या 15 तक पहुंच गई। इसमें गैंगरेप कांड के विवेचक आरके सिंह भी निलंबित कर दिए गए।
हाईकोर्ट के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद जांच का पहला दायरा पुलिस की कार्रवाई पर फोकस करेगा जिसमें निलंबित हुए अफसरों से पूछताछ हो सकती है। साथ ही कार्रवाई की पड़ताल के लिए भी उनके बयान लिए जा सकते हैं।
पुलिस ने किया जांच से किनारा
मामला सीबीआई के पाले में जाने के आदेश के बाद से ही स्थानीय पुलिस ने गैंगरेप मामले विवेचना से किनारा कर लिया है। हालांकि अफसर खुल कर बोलने के लिए तैयार नहीं लेकिन उनका इशारा यही है कि अब जांच तो सीबीआई ही करेगी।
शायद इसी लिए पुलिस ने अब चार आरोपियों की रिमांड नहीं ली। साथ ही सलीम, परवेज और साजिद की शिनाख्त परेड की कवायद भी शुरू नहीं की। यहां तक की विवेचक के सस्पेंड होने के बाद केस में नया विवेचक भी नियुक्त नहीं किया।
खुलासे पर होंगे सवाल
मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट के दखल पर पुलिस ने आनन-फानन छह आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा भले ही कर दिया हो लेकिन आरोपियों के बीच संबंध, उनकी हिस्ट्रीशीट और वारदात में उनकी सहभागिता की बाबत पुलिस का खुलासा न कर पाना अब सवालों के घेरे में है।
खुलासे की पड़ताल में सीबीआई गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य और मोडस आपरेंडी की बाबत भी पड़ताल करेगी।