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विरोधियों को फंसाने के लिए कराई थी संजय की हत्या

Sat, 03 Sep 2016 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
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क्राइम - फोटो : अमर उजाला
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किसौला गांव में ग्राम प्रधान की रंजिश के चलते विपक्षियों को फंसाने के लिए भाड़े के शूटरों से संजय की हत्या कराई थी। स्याना पुलिस ने वारदात का खुलासा करते हुए दो शूटरों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि साजिशकर्ता सहित पांच आरोपी फरार हैं। हत्या के मामले में नामजद हुए पांचों आरोपी पुलिस जांच में बेकसूर पाए गए हैं। पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया है।
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एसएसपी अनीस अहमद अंसारी ने बताया कि किसौला निवासी राजीव पुत्र विजय सिंह ने 29 जून 2016 को पांच लोगों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि बड़े भाई संजय की 29 जून की सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई।

पुलिस ने तहरीर के आधार पर किसौला के ग्राम प्रधान निर्दोष, प्रमुख शिक्षाविद विपिन त्यागी, विकास, नीरज व आलोक के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। दो माह तक वारदात का खुलासा न करने पर इंस्पेक्टर दिनेश कुमार वशिष्ठ को हटाकर इंस्पेक्टर आरके शर्मा को स्याना भेजा गया था।
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उन्होंने विवेचना में  सभी नामजद आरोपियों को बेकसूर पाया। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने बताया कि संजय की हत्या शूटर अरुण उर्फ गुंजन पुत्र चंद्रपाल जाट निवासी गांव सिखेड़ा थाना कोतवाली देहात, नरेंद्र पुत्र रामकिशन निवासी गांव अमीनगर चंदेरू थाना सिकंद्राबाद और नितिन पुत्र महेंद्र निवासी गांव किसौला थाना स्याना के अलावा पांच अन्य आरोपियों के नाम प्रकाश में आए हैं।

हत्या को प्रधानी के चुनाव की रंजिश में किसौला में रह रहे गांव सिखेड़ा निवासी युवक ने अपने साथियों की मदद से अंजाम दिलाया था।  पुलिस ने शुक्रवार सुबह सूचना पर तीनों आरोपियों को पशु पैंठ के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर आलाकत्ल 315 बोर का एक तमंचा भी बरामद कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए अरुण व नरेंद्र ‘पवन गैंग’ के शूटर हैं। उन्होंने अपने साथी आरोपी नितिन की सूचना पर वारदात को अंजाम दिया था। गिरफ्तार आरोपियों ने संजय की हत्या का इकबाल किया है। संजय की हत्या की योजना जेल में बंद गांव किसौला के मोनू त्यागी व गांव ढूसरी थाना शिकारपुर के बबलू जाट ने रची थी।

अरुण उर्फ गुंजन की जान पहचान मोनू त्यागी व बबलू जाट से जेल में हुई थी। आरोपी नितिन जेल में ‘मोनू त्यागी’ से मिलने जाता था तथा मोनू त्यागी व बबलू जाट ने ‘पवन गैंग’ के शूटर अरुण उर्फ गुंजन व नरेंद्र को संजय की हत्या की सुपारी के 20 हजार रुपए दिए थे।

बाकी पैसा काम होने के बाद तय हुआ था, जिसमें नितिन द्वारा संजय के खेत पर होने की सूचना शूटरों को दी गई थी। मोनू त्यागी अपने भाई व भाभी की हत्या के मामले में जेल में बंद है। अरुण उर्फ गुंजन 29 अक्टूबर 2015 को थाना जहांगीराबाद क्षेत्र में त्रिवेणी शुगर मील साबितगढ़ के डिप्टी केन मैनेजर लोकेंद्र सिंह की हत्या में भी संलिप्त रहा है। अरुण शातिर अपराधी है, जिसके विरुद्ध विभिन्न थानों पर दर्जन मामले दर्ज हैं।

विपिन को पार्टीबाजी और रंजिशन फंसाने की थी साजिश
हत्या जैसे गंभीर मामले में नामजद हुए विपिन पुत्र जगन्नाथ ने थाना पुलिस और अधिकारियों का धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो माह से परिवार और वह मानसिक रूप से काफी परेशान थे। उन्होंने कहा कि पुलिस को शुरुआत में पता चला कि था कि वह निर्दोष हैं। इसलिए पुलिस की ओर से उन्हें कभी तंग नहीं किया गया।

लेकिन असली आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से लगातार चिंता बढ़ रही थी। विपिन ने कहा कि क्षेत्र में उनके शैक्षणिक संस्थान हैं। विकाश से चिढ़कर रंजिशन फंसाने की साजिश थी। जो नाकाम हुई।

खुलासे में मिले कई झोल
पत्रकार वार्ता में भागे हुए आरोपियों के नाम खोलने वाली पुलिस ने हत्या जैसे संगीन मामले में भागे हुए आरोपियों के नाम नहीं खोले। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने भागे हुए आरोपियों के नाम इसलिए नहीं खोले हैं ताकि विवेचना के दौरान खेल किया जा सके। हालांकि इसके पीछे पुलिस की दलील है कि यदि आरोपियों के नाम मीडिया में आ गए तो आरोपी दूर भाग जाएंगे।
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