करीब दो साल पहले विचाराधीन कैदी को बुलंदशहर जेल से लेकर मुजफ्फरनगर गए कांस्टेबल नरेंद्र ने अपनी जान पर खेलकर कैदियों को बचाया था। मरने से पहले कांस्टेबल नरेंद्र सिंह और उसके साथियों ने गैंगवार में फायरिंग कर रहे बदमाशों के छक्के छुड़ा दिए थे। जबकि उसके दो साथी घायल हो गए थे।
शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कांस्टेबल नरेंद्र सिंह को मरणोपरांत वीरता पदक प्रदान करेंगे जबकि उसके दो साथी मलखान सिंह और उधम सिंह भी सम्मानित होंगे। बता दें कि 10 अक्तूबर 2014 को जनपद बुलंदशहर से मुजफ्फरनगर कोर्ट में पेशी के लिए बदमाश रोबिन त्यागी को लेकर जनपद पुलिस गई थी।
रोबिन त्यागी मुजफ्फरनगर के छपार का रहने वाला है। वह वर्ष 2014 में बुलंदशहर जेल में हत्या के मामले में बंद था। 10 अक्तूबर 2014 को उसकी मुजफ्फरनगर कोर्ट में तारीख थी। शाम को लौटते समय मुजफ्फरनगर के थाना मंसूरपुर क्षेत्र में पुलिस की गाड़ी पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी।
इस घटना में एक पुलिस कांस्टेबल नरेंद्र सिंह की मौत हो गई थी जबकि एक एचसीपी ऊधम सिंह और कांस्टेबल मलखान सिंह घायल हो गए थे। नरेंद्र और उसके दो साथियों ने बदमाशों द्वारा की जा रही फायरिंग का मुंहतोड़ जबाव दिया था। पुलिस वैन की चादर को भेदकर एके-47 की एक गोली बदमाश रोबिन त्यागी को लगी थी जिसमें वह घायल हो गया था।
एसएसपी सोनिया सिंह ने बताया कि शनिवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बागपत के रहने वाले नरेंद्र को मरणोपरांत वीरता पदक प्रदान करेंगे जबकि एचसीपी ऊधम सिंह और कांस्टेबल मलखान सिंह को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। उधम सिंह वर्तमान में मेरठ में तैनात हैं जबकि मलखान सिंह की तैनाती गौतमबुद्ध नगर में है।