चौकी क्षेत्र के गांव गांगरोल स्थित ननिहाल में मासूम भाई-बहन ने चूरन समझकर चूहेमार दवा खा ली। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले गए जहां से उन्हें मेरठ रेफर किया गया लेकिन वे उसे बुलंदशहर के निजी अस्पताल ले आए। वहां इलाज के दौरान भाई की मौत हो गई। इसके बाद बहन को परिजन मेरठ ले गए जहां उसका इलाज चल रहा है।
जनपद गौतमबुद्धनगर के थाना रबूपुरा के गांव फलैदा निवासी किसान अशोक कुमार ने बताया कि ससुराल चोला चौकी क्षेत्र के गांव गांगरोल में उसकी ससुराल है जहां उसकी बेटी आरती (6) पिछले कुछ सालों से ननिहाल में रहकर नंगलाबंशी स्थित स्कूल में पढ़ती है। करीब दो सप्ताह पहले पत्नी रानी अपने साथ पुत्र अन्नू (4) को लेकर गांगरोल आई थी।
रानी के पिता चंद्रपाल सिंह ने चूहे मारने के लिए दवा लाकर घर में रखी थी। बृहस्पतिवार रात करीब 8.30 बजे यह दवा अन्नू और आरती के हाथ लग गई। दोनों ने उसे चूरन समझकर खा लिया। करीब आधे घंटे के बाद दोनों को उल्टियां होने लगीं तो परिजनों ने दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया।
वहां डॉक्टरों ने उन्हें मेरठ रेफर किया लेकिन परिजन दोनों को बुलंदशहर के ही निजी अस्पताल में ले गए। वहां अन्नू ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन आरती को मेरठ ले गए जहां आरती का इलाज चल रहा है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
वहीं, गांव फलैदा में अन्नू की मौत और आरती की हालत गंभीर होने से मातम का माहौल है। गांव के लोगों में परिजनों की लापरवाही की चर्चा है।
खुद को कोस रहे परिजन
परिजनों की लापरवाही अपनों पर ही भारी पड़ गई। यदि परिजनों ने चूहेमार दवा को बच्चों की पहुंच से दूर सुरक्षित स्थान पर रखा होता तो आज अन्नू जिंदा होता। इस लापरवाही के लिए परिजन अपने आप को ही कोस रहे हैं।
कीटनाशक-जहरीले पदार्थ खुलें में न रखें
कीटनाशक दवाओं और अन्य जहरीले पदार्थों को खुले में न रखें। ऐसे जहरीले पदार्थ घर पर ऐसे स्थानों पर रखें जो बच्चों की पहुंच से दूर हों। खाने-पीने के सामानों के साथ कभी भी इस तरह जहरीले पदार्थ न रखें।
बोले डॉक्टर
अगर गलती से या किसी कारणवश बच्चा या कोई अन्य व्यक्ति ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया हो तो तत्काल नमक का घोल पिलाकर उलटी करवाने का प्रयास करें। जितनी जल्दी हो सके उसे चिकित्सक के पास ले जाएं। ज्यादा मात्रा में ठंडा पानी पिलाने से भी जहर का असर कम हो जाता है।
- डॉ. एसके गर्ग, वरिष्ठ फिजीशियन