नगर कोतवाली क्षेत्र में चार दिन पहले हुई हिस्ट्रीशीटर हत्यारोपी की हत्या उसके दोस्त पुष्पेंद्र ने ही एक हजार रुपये के लिए की थी। पुलिस ने पुष्पेंद्र को गिरफ्तार कर लिया और उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल तमंचा भी बरामद कर लिया।
नगर कोतवाल पोसी राम शर्मा ने बताया कि देवीपुरा प्रथम निवासी हिस्ट्रीशीटर मूला उर्फ मूलचंद पुत्र स्व. भगवानदास एक साल से जेल में बंद था। करीब 15 दिन पहले ही वह जमानत पर जेल से रिहा हुआ था। 23 नवंबर की शाम वह संदिग्ध हालात में लापता हो गया था। 25 नवंबर को उसकी मां शकुंतला देवी ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
इसके अगले दिन 26 नवंबर की रात काली नदी में मूला की लाश मिली थी। शकुंतला देवी ने मोहल्ले के ही पुष्पेंद्र और उसके भाई गंगा को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस पुष्पेंद्र और उसके भाई की तलाश कर रही थी। नगर कोतवाल ने बताया कि 28 नवंबर की रात पुष्पेंद्र पुत्र सुक्का को काली नदी पुल के पास से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में पुष्पेंद्र ने पुलिस को बताया कि मूला उर्फ मूलचंद उसका बचपन का दोस्त था। दोनों ने 22 नवंबर को खंभे लगाने के लिए गड्ढे खोदे थे। इसके एवज में दोनों को तीन हजार रुपये की मजदूरी मिली थी। मूला ने पुष्पेंद्र को महज 500 रुपये दिए लेकिन पुष्पेंद्र अपने हिस्से के एक हजार रुपये और मांग रहा था। इसी बात को लेकर पुष्पेंद्र का मूला से विवाद हो गया।
अगले दिन 23 नवंबर की शाम पुष्पेंद्र मूला को बलाकर लाया और काली नदी के किनारे मूला से झगड़ा किया। पुष्पेंद्र ने तमंचे से मूला की गोली मारकर हत्या कर दी थी। नगर कोतवाल पोसी राम शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में पुष्पेंद्र के भाई गंगा की नामजदगी फर्जी पाई गई है।