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50 हजार का इनामी हजरतपुरिया गिरफ्तार

Sat, 02 Jan 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला, बुलंदशहर
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पुलिस के लिए सिरदर्द बने 50 हजार के इनामी मुकेश हजरतपुरिया और पांच हजार के इनामी गजेंद्र को शनिवार सुबह मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
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शिकारपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव डडुआ के निकट हुई मुठभेड़ में दो कांस्टेबल घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में एक गोली मुकेश के पैर में लगने पर उसे जिला अस्पताल से हायर सेंटर मेरठ रेफर किया गया है।

पुलिस को उसके पास से लूटी गई रायफल, एक पिस्टल और कारतूस सहित दो तमंचे बरामद किए हैं। एसएसपी अनंत देव ने बताया कि त्रिवेणी शुगर मील साबितगढ़ के डिप्टी केन मैनेजर लोकेंद्र सिंह की 29 अक्टूबर 2015 को मुकेश ने साथियों संग गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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इसके बाद 12 हजार के इनामी मुकेश हजरतपुरिया पर शासन ने 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया था। एसएसपी ने बताया कि गांव हजरतपुर निवासी सरजीत उर्फ सुभाष पुत्र रोहन ने शनिवार सुबह करीब 5.30 बजे पुलिस को सूचना दी कि कार में कुछ बदमाश उसकी हत्या करने के लिए आ रहे हैं।

सूचना पर क्राइम ब्रांच अहमदगढ़, शिकारपुर, पहासू, सलेमपुर थानों की पुलिस के साथ शिकारपुर-अनूपशहर रोड पर पहुंच गई। तभी गांव डडुआ के निकट एक कार आती दिखाई दी। गाड़ी को रुकने का इशारा किया तो कार सवार बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

जवाबी फायरिंग पर कार में बैठे बदमाश पैदल भागने लगे। बदमाशों की ओर से हुई फायरिंग में कांस्टेबल कुलवंत मलिक और जाहिद घायल हो गए। पुलिस ने कार छोड़कर जख्मी हालत में भाग रहे एक बदमाश को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम मुकेश पुत्र यशपाल सिंह निवासी हजरतपुर बताया।

तभी पुलिस के अन्य सदस्यों ने भाग रहे मुकेश के साथी गजेंद्र उर्फ गज्जू पुत्र धर्मवीर निवासी शेखपुर मानपुर को भी पकड़ लिया। जबकि एक बदमाश भागने में सफल रहा। पुलिस ने घायल मुकेश को जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां से डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर मेरठ रेफर कर दिया।

गौरतलब है कि डिबाई विधायक गुड्डू पंडित ने जिले के इनामी अपराधियों को पकड़ने के लिए शासन से मांग की थी, जिसमें मुकेश का नाम भी शामिल था। एसएसपी अनंत देव ने बताया कि शनिवार सुबह शिकारपुर थाना क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद 50 हजार के इनामी बदमाश मुकेश को गिरफ्तार किया है।

एसपी क्राइम अरविंद कुमार पांडेय के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच ने सफलता हासिल की है। मुकेश पर हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी समेत करीब 26 मामले दर्ज हैं। उधर, मुकेश के मारे जाने की खबर से लोग खुश हुए लेकिन घायल होने का पता चलने पर मायूसी छा गई।

दो दर्जन से अधिक वारदातें की
एसएसपी ने बताया कि मुकेश के खिलाफ वर्ष 1999 में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद मुकेश ने एक के बाद एक कई हत्याएं कीं। मुकेश पर हत्या, डकैती, लूट और रंगदारी के 26 मुकदमे दर्ज हैं।

रंगदारी में काटी सजा
वर्ष 2006 में मुकेश के खिलाफ थाना अहमदगढ़ में रंगदारी मांगने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की। कोर्ट ने मुकेश को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। जमानत पर बाहर आने के बाद मुकेश ने लगातार वारदातों को अंजाम दिया।

सीबीआई को थी तलाश
एसएसपी अनंत देव ने बताया कि कुछ साल पहले सुभारती मेडिकल कॉलेज मेरठ के एकाउंटेंट की हत्या कर दी थी। जिसकी जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई थी।

जांच में मुकेश का नाम भी आया, जिसके बाद सीबीआई मुकेश की तलाश कर रही थी। सीबीआई ने दिसंबर 2015 में मुकेश की संपत्ति पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया था।

पिता -पुत्र पहले से जेल में
एसएसपी ने बताया कि मुकेश का बेटा रौबिन हत्या के मामले में पिछले डेढ़ साल से जेल में है। जबकि मुकेश के पिता यशपाल को दिसंबर 2015 में जेल भेजा था।

17 की उम्र में रखा अपराध में कदम
मुकेश ने पुलिस को बताया कि जब वह 11 साल का था तो गांव के दो युवकों ने लूट का विरोध करने पर उसकी मां को गोली मार दी थी। जिसमें उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई थी। जब वह 17 साल का हुआ तो उसने उन दोनों युवकों से बदला लिया।

अपनों का बहाया खून
एसएसपी ने बताया कि मुकेश के पिता यशपाल का पारिवारिक लोगों से 27 बीघा जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। जमीन वापस लेने के लिए मुकेश ने अपनों का ही खून बहाया। इसमें मुकेश के पिता ने भी साथ दिया।
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तौल केंद्रों पर थी सुरक्षा
डिप्टी केन मैनेजर लोकेंद्र की हत्या के बाद गन्ना तौल केंद्रों पर उन्होंने सुरक्षा मुहैया कराई थी। ताकि मुकेश किसी भी तौल केंद्र पर जाकर कोई वारदात न कर सके।
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