अपर सत्र न्यायाधीश एटीसी प्रथम/गैंगस्टर कोर्ट मोहन लाल विश्वकर्मा ने साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए सुंदर भाटी को गैंगस्टर एक्ट के केस से बरी कर दिया । सुंदर भाटी पर 2002 में तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर तत्कालीन एसओ सिकंदराबाद ने गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
लोक अभियोजक हरीओम शर्मा ने बताया कि वर्ष 2002 में तत्कालीन थानाध्यक्ष सिकंदराबाद टीडी बेला ने तत्कालीन जिलाधिकारी के अनुमोदन पर सुंदरभाटी और उसके साथी यशवीर फौजी पुत्र चंद्रपाल जाट निवासी पारसौल के खिलाफ अपराध संख्या 129/2002 व धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
दोनों पर आरोप था कि ये लोग गिरोह बनाकर आर्थिक और भौतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से आपराधिक वारदात करते हैं। अधिवक्ता ने बताया कि सुंदर भाटी के साथी यशवीर की कुछ समय पहले ही मौत हो चुकी है। सुंदर भाटी वर्ष 2002 से पहले के केसों में पहले ही बरी हो चुका है।
न्यायालयों के निर्णयों की कॉपी न्यायाधीश के समक्ष पेश कर दी गई। अपर सत्र न्यायाधीश एटीसी प्रथम/गैंगस्टर कोर्ट मोहन लाल विश्वकर्मा ने साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए सुंदर भाटी को दोषमुक्त कर दिया। अधिवक्ता ने बताया कि सुरक्षा कारणों के चलते सुंदर भाटी मंगलवार को न्यायालय में पेश नहीं हुआ। इस मामले में रिहाई का परवाना हमीरपुर कारागार भेज दिया है।