दवा खरीद फर्जीवाड़े में सर्तकता विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। दवा खरीद घोटाले के आरोपियों के खिलाफ विजिलेंस मेरठ ने नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।
पांच स्वास्थ्य अफसरों और दवा कंपनी प्रबंधक के खिलाफ कई धाराओं में एफआईआर हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों द्वारा वर्ष 1999 में बिना किसी दर अनुबंध के लाखों रुपये की दवाएं खरीदी गई थीं।
अफसरों ने इंडेट भी फर्म की जगह संचालक के नाम दिए थे। मामला खुलने के बाद सर्तकता सचिव ने जांच के आदेश दिए थे।
विजिलेंस मेरठ ने जांच के बाद तत्कालीन सीएमओ, सीएमएस समेत सात स्वास्थ्य अफसरों को दोषी माना था, लेकिन तत्कालीन सीएमओ और तत्कालीन चीफ फार्मासिस्ट की मौत हो जाने के कारण पांच स्वास्थ्य अफसरों और दवा कंपनी प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
जांच में पता चला कि अफसरों ने दवा खरीद में 3 लाख 57 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा किया। विजिलेंस इंस्पेक्टर अजय सिंह ने नगर कोतवाली में सभी आरोपी अफसरों और दवा सप्लायर के खिलाफ आईपीसी की धारा 467, 420, 471, 120 बी, 13(1)डी और 13(2) के तहत एफआईआर दर्ज कराई है।