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क्लीनचिट वाले सेंटरों पर हो रहा था भ्रूण लिंग परीक्षण

Mon, 19 Jun 2017 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
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क्राइम - फोटो : अमर उजाला
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भ्रूण लिंग जांच पर शासन बेशक गंभीर हो, लेकिन स्थानीय अफसर लापरवाह बनें हैं। भ्रूण लिंग जांच के लिए जनपद मुफीद बन चुका है। इस धंधे में शामिल चिकित्सकों और दलालों को अफसरों का संरक्षण मिलता है। 

प्रशासन ने जिन चार अल्ट्रासाउंड सेंटरों को भ्रूण लिंग जांच में सील किया, स्वास्थ्य विभाग के अफसर उनकी रिपोर्ट शासन को ओके भेजते थे। दूसरे राज्य के अफसरों ने तो भ्रूण लिंग जांच पकड़ ली, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य व प्रशासनिक अफसरों को यह दिखी ही नहीं।
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बुधवार को नगर के शोभाराम अल्ट्रासाउंड सेंटर, सोलंकी नर्सिंग होम, लाल अल्ट्रासाउंड सेंटर और तेवतिया नर्सिंग होम पर छापामारी कर भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़ हुआ था। शोभाराम अल्ट्रासाउंड सेंटर और सोलंकी नर्सिंग होम के संचालक समेत सात लोगों को जेल भेजा गया था, जबकि लाल अल्ट्रासाउंड सेंटर और तेवतिया नर्सिंग होम को सील कर दिया गया।

इन अल्ट्रासाउंड सेंटर के खिलाफ कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर माह अल्ट्रासाउंड सेंटरों की रिपोर्ट शासन को भेजता है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के नोडल अफसर डिप्टी सीएमओ डॉ. लेखराम की रिपोर्ट में कहीं भ्रूण लिंग जांच का जिक्र नहीं था।

प्रशासन ने करीब एक दर्जन से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटरों का स्टिंग किया है। शोभाराम अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहले भी भ्रूण लिंग जांच के मामले सामने आए। कई बार सीलिंग की कार्रवाई की गई, लेकिन हर बार जांच में क्लीन चिट दी जाती रही। जिला प्रशासन की कार्रवाई में सेंटर संचालक को जेल भेज दिया गया, जबकि डिप्टी सीएमओ   ने हर बार संचालक को क्लीन चिट दी।

अब अब्दुल्ला अस्पताल पर सीलिंग की तलवार
नगर के अब्दुल्ला अस्पताल के पंजीकरण रद्द होने के बाद अब उसे सील करने की तैयारी प्रशासन ने शुरू कर दी है। अस्पताल संचालक हकीम की डिग्री लेकर मरीजों का ऑपरेशन कर रहा था। नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं देने पर प्रशासन की कार्रवाई करेगा। नगर के दिल्ली रोड स्थित अब्दुल्ला हॉस्पीटल में निरीक्षण के दौरान व्यापक स्तर पर अनियमितता मिली थीं।
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इसपर सीएमओ ने अस्पताल का पंजीकरण रद्द कर दिया था। प्रशासन ने अस्पताल संचालक को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। जबकि नियमानुसार पंजीकरण रद्द होने के बाद अस्पताल में मरीज का उपचार नहीं किया जा सकता है।

अब्दुल्ला अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। अस्पताल संचालक को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
स्वास्थ्य विभाग को स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर दिया जाएगा। जो खामियां हैं, उन्हें दूर कर लिया जाएगा।  डॉ. यूनुस, संचालक, अब्दुल्ला हॉस्पीटल
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