कस्बे के निकट पीर मजार पर उनके मुरीद का शव दफनाने पर हजारों लोगों में रोष उत्पन्न हो गया। हंगामे की सूचना पर पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया।
विवाद बढ़ता देख पुलिस ने शव दफनाने आए लोगों से संपर्क साधा। पुलिस अफसरों के समझाने पर वे शव को कब्र से निकालकर अमरपुर चले गए जहां उसका दफीना हुआ।
खानपुर थाना क्षेत्र के गांव अमरपुर निवासी अब्दुल करीम का बुधवार दोपहर इंतकाल हो गया था। उनका कई वर्षों से नरसेना के पीर मजार पर आना जाना था। उनकी अंतिम इच्छा थी कि इंतकाल के बाद उनके शव को पीर के बराबर में ही दफनाया जाए।
ग्रामीणों के मुताबिक, बाबा अब्दुल करीम 90 वर्ष के थे और उनके हजारों मुरीद थे। बाबा का इंतकाल होने के बाद उनका भांजा अनवार पुत्र अहमद ने अनेक मुरीदों के साथ बाबा को पीर के बराबर वाले मुसाफिर कमरे में दफना दिया। उससे पहले पीर के बराबर में बाबा को दफनाने की कोशिश की।
दफनाने बाद बाबा के मुरीदों ने मजार पर ही भत्री रोटी की। इस मौके पर सीतापुर, बरेली, अलीगढ़, मुरादाबाद, हसनपुर, सीयाली से आए बाबा के मुरीद मौजूद थे।
पीर के निकट बाबा का शव को दफना देख ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मजार के फादिम नौशाद को बुलाया और देखते देखते हजारों की तादात मे लोग इकट्ठा हो गए।
हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने विरोध को देखते हुए दफनाकर गए लोगों को बुला लिया। बुधवार रात उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में शव को कब्र से निकाला और अमरपुर ले जाकर दफना दिया। तब ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ।