वाणिज्य कर विभाग ने अवैध रूप से ले जाई जा रही एक नामी कंपनी के कफ सीरप का जखीरा दो बार में पकड़ा है। बिना विधिक दस्तावेजों के इस दवा को गाजियाबाद से आगरा ले जाया जा रहा था। जांच में पता चला कि सीरप का इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जा रहा था। अफसरों ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
वाणिज्य कर विभाग की सचल दल इकाई को सूचना मिली कि भूड़ चौराहे से एक नामी कंपनी के कफ सीरप बिना किसी विधिक दस्तावेजों के गाजियाबाद से आगरा लाए जा रहे हैं। सचल दल के असिस्टेंट कमिश्नर विकास सेठ के नेतृत्व में मंगलवार रात भूड़ चौराहे पर नाकाबंदी कर दी गई है।
नाकाबंदी देखकर ट्रक चालक ने भागने का प्रयास किया गया, लेकिन अफसरों ने ट्रक को पकड़ लिया। ट्रक में एक नामी कंपनी के कफ सीरप मिले। चालक के पास दवाओं का कोई प्रपत्र नहीं मिला। दवा की कीमत 11.30 लाख रुपये थी। विभाग ने ट्रक सीज कर दवा व्यापारी से 4.66 लाख रुपये का जुर्माना वसूला।
इससे पहले पांच जुलाई को इसी दवा कंपनी के इसी कफ सीरप की करीब 35 लाख रुपये की खेप पकड़ी गई थी। तब भी यह दवा बिना कागजों के आधार पर सप्लाई की जा रही थी। तब विभाग ने दवा व्यापारी से 14.32 लाख रुपये का जुर्माना वसूल किया।
दो बार इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद जब जांच की गई तो अफसरों के भी होश उड़ गए। दवा की इस खेप को नशे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए सप्लाई किया जा रहा था। अफसरों ने पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
‘शिथिल हो जाता है सेंट्रल नर्वस सिस्टम’
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि इस दवा के लगातार सेवन से काफी नुकसान होता है। यह दवा सिर्फ डॉक्टर की एडवाइज के बाद ही मेडिकल स्टोर पर मिल सकती है। इस दवा के सेवन से व्यक्ति का सेंट्रल नर्वस सिस्टम शिथिल हो जाता है, जिससे उसे रिलेक्स महसूस होता है और वह इसका आदी हो जाता है।
इससे दिमाग का बैलेंस बिगड़ जाता है। पेट की बीमारियां हो जाती हैं। नींद ज्यादा आने लगती है।
एक नामी कंपनी के कफ सीरप की खेप इस माह में दो बार पकड़ी है। पहली बार करीब 35 लाख रुपये और दूसरी बार 11.30 लाख रुपये की दवाएं अवैध रूप से सप्लाई होती
पाई गई हैं। दोनों बार दवा व्यापारी से करीब 20 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है। शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। - आरडी प्रसाद, ज्वाइंट कमिश्नर, वाणिज्य कर