एनएच-91 गैंगरेप कांड में गिरफ्तार सलीम बावरिया, जुबैर उर्फ परवेज बावरिया और साजिद बावरिया के बयानों की तस्दीक के लिए सीबीआई ने तिर्वा में डेरा जमा लिया है। रविवार देर शाम यहां पहुंची दो सदस्यीय टीम ने आरोपियों की पत्नियों से पूछताछ के साथ ही उनकी क्राइम हिस्ट्री, कमाई का जरिया और नाते-रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
टीम के सदस्यों को कोतवाल आरपी पांडे ने रविवार को बताया कि आरोपियों के खिलाफ जिले में कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। तब देर रात सीबीआई टीम आरोपियों की शरण स्थली रामपुर बिनौरा गांव के जोगिन डेरा बस्ती में जा पहुंची। साथ में स्थानीय पुलिस भी थी। डेरे पर कुछ महिलाएं थीं, जो पुलिस को देखते ही भाग निकलीं।
वहां से खाली हाथ लौटी टीम सोमवार सुबह दस बजे फिर कोतवाली पहुंची तो पुलिस ने वहां सलीम, जुबैर व साजिद की पत्नियों को पहले से ही बैठा रखा था। डेरे की पांच-छह अन्य महिलाएं भी थीं। सीबीआई ने इनसे बंद कमरे में दो घंटे तक पूछताछ की, फिर जाने की इजाजत दे दी।
बाद में टीम ने रामपुर बिनौरा के पूर्व प्रधान व तिर्वा तहसील के अधिवक्ता रामरतन पाल से मोबाइल पर बात की। टीम ने उनसे डेरे में रहने वाले लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी ली। रामरतन पाल ने बताया कि वर्ष 2011 से ये लोग डेरा डालकर यहां रह रहे हैं। इस डेरे में करीब 40 से 45 परिवार हैं। ज्यादातर आपस में रिश्तेदार हैं।
टीम के सदस्यों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर जांच-पड़ताल शुरू की गई है। तीनाें ने जो बयान दिए हैं, उन्हीं की तस्दीक की जा रही है। इनकी पत्नियों से कमाई का जरिया व परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में पूछताछ की गई है।
दो-तीन माह में घर जाता था सलीम
सलीम की पत्नी ने बताया कि उसके तीन बच्चे हैं। वह मेहनत मजदूरी करती है। पति सलीम दो-तीन माह बाहर रहकर कमाता है। कभी-कभी एक-दो दिन के लिए घर लौटता है। बताते हैं कि सलीम पर हत्या, लूट, डकैती के अन्य मामले दूसरे राज्यों में दर्ज हैं।
वर्ष 2011 से डाल रखा है डेरा
बिनौरा रामपुर गांव के लोगों ने बताया कि वर्ष 2011 में इन लोगों ने डेढ़ बीघा जमीन खरीदकर रहना शुरू किया था। धीरे-धीरे उस जमीन के निकट ढाई बीघा ग्राम समाज की जमीन भी कब्जा ली। करीब चार बीघा भूमि पर रहने वाले करीब 40 से 45 परिवार हैं।
इन लोगों ने डेरे के अंदर घुसने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर रखी है। किसी भी अपरिचित व्यक्ति को अंदर घुसने की इजाजत नहीं है। डेरे के अंदर इन लोगों ने खतरनाक कुत्ते खुले छोड़ रखे हैं। यदि कोई भूल से भी डेरे के अंदर घुस जाता है तो उस पर कुत्ते झपट्टा मार देते हैं।
कन्नौज से बुलंदशहर-दिल्ली में बैठे अफसरों को दी जानकारी
सीबीआई टीम के इंस्पेक्टर रैंक के दो अधिकारी सोमवार शाम तक कन्नौज में रुके हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, यह टीम सवालों की लंबी फेहरिस्त लेकर कन्नौज पहुंची थी। सवालों के जबाव मिलने के बाद बुलंदशहर और दिल्ली में बैठे अफसरों को पूरी जानकारी दी। दोनों अधिकारी बुलंदशहर-दिल्ली में बैठे अफसरों के दिशा-निर्देश पर काम करते रहे।
पुलिसकर्मियों की धड़कनें हुईं तेज
एक ओर सीबीआई टीम कन्नौज में रिमांड पर लिए आरोपियों के बयानों की तस्दीक कर रहे थे। उधर, खुलासा कर अपनी पीठ थपथपाने वाले पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। सूत्रों के मुताबिक यदि खुलासा फर्जी निकला तो कई पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की नौकरी भी जा सकती है।