जमीन की रंजिश में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के मामले में एक आरोपी को दोषी मानते हुए कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जबकि तीन आरोपियों को 2003 में ही फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने तीनों की सजा आजीवन कारावास में बदल दी है।
एक हत्यारोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। जबकि एक आरोपी का बाल न्यायालय में मामला चल रहा है। फांसी का आदेश अपर सत्र न्यायाधीश पंचम सुनील कुमार वर्मा के न्यायालय ने दिया है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रताप सिंह अंबा ने बताया कि वादी राम गोपाल सिंह पुत्र लीला सिंह निवासी एंचोरा थाना अनूपशहर ने 11 सितंबर 1997 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
लीला ने बताया था कि उनका सगे भतीजे सतेंद्र सिंह व संजीव पुत्र बहोरी सिंह से जमीन की रंजिश चल रही थी। 10 सितंबर 1997 को वादी की पत्नी मुन्नी देवी व भतीजा सत्यवान पुत्र अजयपाल सिंह गांव जयरामपुर विजयपाल सिंह के यहां शाम करीब 5.30 बजे लौट रहे थे।
तभी रास्ते में सतेंद्र सिंह, संजीव पुत्र बहोरी सिंह, प्रीतम सिंह पुत्र राजवीर सिंह निवासी गांव एंचोरा व रामवतार सिंह पुत्र हरी सिंह निवासी सहार छतारी और साला प्रीतम सिंह ने पत्नी व भतीजा सत्यवान को कांति व श्रीमोहन के खेत में घेर लिया।
इन लोगों ने मुन्नी देवी की गोली मारकर हत्या कर दी लेकिन सत्यवान भागने में सफल हो गया। इसके बाद हमलावर वादी के घर पहुंचे और विकासवीर व कु. लवली को शांति देवी व कु. पूजा ने पकड़कर आंगन में काट दिया। इसी बीच वादी की भाभी विजयवती भी आ गई। हमलावरों ने विजयवती को भी पकड़कर तलवार व गंड़ासा से मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपी सतेंद्र, संजीव, प्रीतम सिंह, रामोतार सिंह, शांती देवी व कुमारी पूजा के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। मामले में विचारण प्रीतम, रामऔतार व शांति देवी के खिलाफ एडीजे तृतीय के न्यायालय न्यायाधीश लक्ष्मीचंद के समक्ष विचारित हुए। जिसमें 15 फरवरी 2003 को तीन आरोपियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा व छह-छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
फरार होने से आरोपी सतेंद्र और संजीव की फाइल को अलग कर दिया था। पूजा का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। वादी राम गोपाल सिंह की 2008 में मौत हो चुकी है। 2010 में पंजाब पुलिस ने सतेंद्र को पकड़कर जेल भेजा था। सतेंद्र के वाद पर एडीजे पंचम ने सुनवाई की। जिसके बाद कोर्ट ने सतेंद्र को भी दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। जबकि संजीव अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
कोर्ट ने वारदात को विरल से विरलतम बताया
न्यायाधीश ने सतेंद्र द्वारा अपने सगे संबंधियों(चाचा-ताऊ) के परिवार के साथ किए गए बर्बरतापूर्वक क्रूर तरीके से हत्या को विरल से विरलतम बताया है।
कुल नौ गवाहों ने दी गवाही
अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाही हुई। न्यायाधीश ने गवाहों की गवाही और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच बहस को सुना। इसके बाद न्यायाधीश ने निर्णय दिया।
मौत हो जाने तक फंदे पर लटकाने के दिए आदेश
न्यायाधीश ने कहा है कि सतेंद्र को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए जब तक कि उसकी मौत न हो जाए।