तेरह साल पहले महानगर के सासनी गेट इलाके से दो व्यापारियों को अगवा करने के बाद सिर काटकर हत्या करने के मामले में एडीजे तृतीय के न्यायालय में एक आरोपी को उम्रकैद व चालीस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। इस मुकदमे में बाकी पांच आरोपियों को अदालत ने साक्ष्यों व गवाही के अभाव में बरी कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी महाराज सिंह के अनुसार 16 दिसंबर 2003 की सुबह लोधा क्षेत्र के जौफरी-सलेमपुर माफी के मध्य माइनर में दो सिर विहीन लाशें मिली थीं। कुछ दूरी पर बिटौरे में उपलों के बीच दोनों के सिर जलते हुए मिले थे। गांव के चौकीदार गंगा सहाय निवासी वाजीदपुर की सूचना पर पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में कर अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया था।
अगले दिन पुरुषोत्तम निवासी दुर्गापुरी जयगंज सासनी गेट ने थाने पहुंचकर यह सूचना पुलिस को दी कि उसका भाई राजू व रिश्तेदार ओमप्रकाश निवासी दाही पहासू बुलंदशहर बीते दो दिनों से लापता हैं। वे दूध खरीदकर पनीर बनाने व बेचने का व्यापार करते थे। इस पर पुरुषोत्तम को जब पोस्टमार्टम केंद्र पर दोनों शव दिखाए गए तो उसने दोनों को पहचान लिया।
बाद में उसने तहरीर देते हुए बताया कि ब्रह्मदेव उर्फ ब्रह्मा निवासी नगला डालचंद्र की दुबे पड़ाव स्थित पनीर की दुकान पर राजू और ओमप्रकाश माल देते थे। ब्रह्मा पर इन दोनों का 80 हजार रुपये बकाया था। कई बार मांगने पर भी वह रुपये नहीं दे रहा था। इसी बीच 15 दिसंबर को लोधा के गांव जौफरी निवासी देशराज उर्फ बाबा रुपये दिलाने का झांसा देकर इन दोनों को अपने साथ ले गया।
इसके बाद उनकी लाश मिली। इस पर पुलिस ने देशराज, ब्रह्मा के अलावा गांव के ही उनके साथी सुरेंद्र, जगदीश, योगेंद्र, हरपाल, वीरपाल को भी आरोपी बनाया। अदालत में सत्र परीक्षण के दौरान देशराज के अलावा किसी के खिलाफ आरोप तय न होने पर अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुना दिया। सभी अन्य आरोपियों को बरी करते हुए देशराज को उम्रकैद व 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
हत्या में तीन सगे भाइयों सहित छह दोषी
चार साल पहले जमानत पर छूटे मुल्जिम की हत्या के मामले में कोर्ट ने तीन सगे भाइयों समेत छह को दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश द्वादश गुलाब सिंह के न्यायालय ने सजा पर निर्णय के लिए 20 फरवरी की तारीख तय की है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी महेश कुमार शर्मा ने बताया कि वादिया जगवीरी देवी पत्नी स्व. इंदरपाल सिंह ने 17 फरवरी को शिकारपुर में एफआईआर दर्ज कराई थी कि उसके पति इंदरपाल सिंह जलालपुर निवासी योगेंद्र उर्फ पप्पू पुत्र विजयवीर की हत्या की साजिश में गिरफ्तार हुए थे।
वे 16 फरवरी 2013 को जमानत पर आए थे कि 17 फरवरी की सुबह करीब नौ बजे गांव के धूम सिंह, मीनू उर्फ प्रमेंद्र, भूपेंद्र पुत्र अजयवीर सिंह, विकास पुत्र योगेंद्र, भगत सिंह उर्फ पुनीत पुत्र भूपेंद्र, सुनील पुत्र अरविंद तथा औमप्रकाश जखैता घर में घुसे और फायरिंग करने लगे। गोली लगने से इंदरपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने विवेचना के बाद धूम सिंह, भूपेंद्र, मीनू उर्फ प्रमेंद्र, विकास, भगत सिंह, सुनील के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी। केस में वादिया सहित 13 गवाहों ने बयान दर्ज कराए। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने इंदरपाल सिंह की हत्या में गांव के तीन भाइयों समेत छह आरोपियों को दोषी करार दिया ।